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लोगों ने श्रमदान कर सुधारी गरीब के कुटिया की छत, मेहनताना के बदले कराया भोजन

3 वर्ष पहले
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धनोरा | धनोरा क्षेत्र में गरीब किसान के कच्चे मकान की छत आसपास के लोगों ने मिलजुलकर सुधार दी। इसके लिए किसान से मजदूरी नहीं ली। आदिवासी समाज की धांस परंपरा के तहत ये काम किया गया। सभी साथी के स्नेह भरे बुलावे पर आए और श्रमदान कर छत सुधारी। इस काम के बदले इन्हें साथी द्वारा सिर्फ भोजन कराया गया। ऐसे नजारे आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में अकसर नजर आते हैं। आदिवासी समाज में धांस परंपरा के तहत किसी गरीब साथी के यहां फसल कटाई हो, मकान की मरम्मत करवाना, कुएं का गहरीकरण ऐसे कई कार्य हैं जो परंपरा के तहत बुलावे पर ग्रामीण मदद के लिए चले आते हैं। फोटो : प्रतीक सोलंकी

यह है धांस परंपरा

धांस का अर्थ होता है मदद। आदिवासी समाज में धांस परंपरा वर्षों पुरानी है। इसमें गांव में जरुरतमंद व्यक्ति द्वारा घर बनाने, मरम्मत, कुएं की सफाई, खेत जोतने, फसल कटाई सहित अन्य काम के लिए निमंत्रण देने पर गांव के लोग काम करने पहंुच जाते हैं। इसके लिए लोग मजदूरी नहीं लेते। उसे सिर्फ दिन में एक बार भोजन कराया जाता है।

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