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एफएसएसएआई मानती है टी-बैग की स्टेपल पिन शरीर के लिए खतरनाक, नियम एक साल बाद होगा लागू

3 वर्ष पहले
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यदि आप टी-बैग उपयोग कर रहे हैं तो गौर कीजिए, कहीं उसमें स्टेपल पिन तो नहीं है। यदि उसमें स्टेपल पिन है तो उसे उपयोग में नहीं लें। वजह- फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से जारी वह नोटिफिकेशन, जिसमें माना गया है कि टी-बैग की स्टेपल पिन सेहत के लिए नुकसानदायक है। आश्चर्य की बात यह कि एक ओर एफएसएसएआई इसे खतरा मानने के बाद भी इसके नियम को स्टेपलयुक्त टी- बैग की खपत पूरी होने के बाद (यानी एक साल बाद) लागू करेगा। किसी भी प्रदेश का फूड डिपार्टमेंट इस एक्ट में कार्रवाई नहीं कर सकता।

एफएसएसएआई को 2017 में पता चला कि टी-बैग में जो पिन स्टेपल किया जाता है, उसमें लोहा होता है और जंग लगने या गर्म पानी में जाने से वह मानव शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में एफएसएसएआई ने 1 जनवरी 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी किया और कहा कि इस पर रोक लगनी चाहिए। सभी फूड अथॉरिटी को यह नोटिफिकेशन भेजा गया, लेकिन साथ ही कहा गया नोटिफिकेशन 2019 के अप्रैल माह से लागू होगा।

गेस्ट्रो डिजीज होंगी : मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार स्टेपल पिन गर्म पानी में यह काफी देर तक डूबी रहती है, ऐसे में लोहे के तत्व भी पानी में घुलते ही हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति लगातार स्टेपल पिन लगे टी-बैग का यूज करता है तो उसे पेट में इंफेक्शन, गले में दर्द हो सकता है। यदि इंफेक्शन अधिक हो जाए तो गेस्ट्रो की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

एफएसएसएआई डेढ़ साल में भी तय नहीं कर सकी कंपाउंड : फूड एक्ट में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति खाने के काम अाने वाले ऑयल को दो से तीन बार से अधिक बार गर्म करके यूज नहीं कर सकता। वजह है, एसिड वेल्यू बढ़ जाती है और वह नुकसान करता है। एफएसएसएआई ने 2017 में एक एडवाइजरी जारी कर कहा यूज्ड ऑयल के लिए कोई पैरामीटर निर्धारित नहीं हैं। इसलिए टोटल पोलर कंपाउंड का निर्धारण करेंगे।लेकिन डेढ़ साल बाद भी एफएसएसएआई टोटल पोलर कंपाउंड का निर्धारण नहीं कर सकी है।

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