बच्चे की बढ़ती हुई डिमांड बुरी आदत का है संकेत, इसे कैसे सुधारें
बच्चों की बढ़ती हुई डिमांड को लेकर आजकल पेरेंट्स परेशान रहने लगे है वे मानते है कि बच्चे जब छोटे थे तो उनकी डिमांड पूरी करना आसान था लेकिन अब बहुत मुश्किल होती है। ये बात सच है कि अगर बच्चों की डिमांड जरुरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो उनमे गलत आदतें पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या क्या करते है डिमांड: महंगे फ़ोन लेने कि जिद करना। महंगी गाड़ी लेने को कहना। देर रात तक पार्टियों में रहना या पार्टी करने की जिद करना। दोस्तों को महंगे होटलो में खाना खिलाने की जिद करना। बहुत ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग करना और महंगे गिफ्ट खरीदना।
व्यवहार में नकारात्मक बदलाव: छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलना जैसे- नंबर कम आने पर घर में नहीं बताना और छुपाना। घर में पेरेंट्स के साथ अग्रेसिव व्यवहार करना और कभी-कभी मारपीट भी करना। घर की चीजों को तोड़ देना। खाने पीने की चीजों पर बहुत ज्यादा खर्चा करना। गुस्से में खुद को नुकसान पहुंचाना और सुसाइड करने की धमकी देना जैसे हाथ काटने कि कोशिश करना और गोलियां खा लेने की बात करना। घर के बाहर ज्यादा समय बिताना। पढ़ने के समय को भी पार्टी और मोबाइल गेम में लगाना। स्मोकिंग और ड्रिकिंग जैसी आदतंे लग जाना। डिमांड ना पूरी करने पर पढ़ाई छोड़ने की बात करना।
पेरेंटिंग
डॉ. नम्रता सिंह
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट, लखनऊ
बच्चों की बढ़ती हुई डिमांड को लेकर आजकल पेरेंट्स परेशान रहने लगे है वे मानते है कि बच्चे जब छोटे थे तो उनकी डिमांड पूरी करना आसान था लेकिन अब बहुत मुश्किल होती है। ये बात सच है कि अगर बच्चों की डिमांड जरुरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो उनमे गलत आदतें पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या क्या करते है डिमांड: महंगे फ़ोन लेने कि जिद करना। महंगी गाड़ी लेने को कहना। देर रात तक पार्टियों में रहना या पार्टी करने की जिद करना। दोस्तों को महंगे होटलो में खाना खिलाने की जिद करना। बहुत ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग करना और महंगे गिफ्ट खरीदना।
व्यवहार में नकारात्मक बदलाव: छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलना जैसे- नंबर कम आने पर घर में नहीं बताना और छुपाना। घर में पेरेंट्स के साथ अग्रेसिव व्यवहार करना और कभी-कभी मारपीट भी करना। घर की चीजों को तोड़ देना। खाने पीने की चीजों पर बहुत ज्यादा खर्चा करना। गुस्से में खुद को नुकसान पहुंचाना और सुसाइड करने की धमकी देना जैसे हाथ काटने कि कोशिश करना और गोलियां खा लेने की बात करना। घर के बाहर ज्यादा समय बिताना। पढ़ने के समय को भी पार्टी और मोबाइल गेम में लगाना। स्मोकिंग और ड्रिकिंग जैसी आदतंे लग जाना। डिमांड ना पूरी करने पर पढ़ाई छोड़ने की बात करना।
क्या करें पेरेंट्स
 बच्चे को मनी मैनेजमेंट सिखाएं।
 बच्चों के लिए रोल मॉडल बनिए।
 बच्चों की डिमांड को तुरंत पूरी ना करे।
 बच्चों के दोस्तों के बारे में पूरी जानकारी रखिए।
 बच्चों को पेरेंट्स खुद शॉपिंग के लिए लेकर जाएं और उनकी शॉपिंग पर ध्यान दें। जरुरत से महंगी चीजों को नहीं दिलाना चाहिए।
 बच्चे को पॉकेट मनी जरुरत से ज्यादा ना दें।
 ज्यादा महंगे या अपनी पोजीशन से ज्यादा कुछ भी करने की कोशिश नहीं करना चाहिए।
 कोई भी ऐसा वादा न करें बच्चे से जिसे पूरा करना मुश्किल लगे।