सरकारी सुस्ती...5 महीने बाद भी कैब संचालन के नियम नहीं हो सके लागू
मुसाफिरों पर मनमाने सरचार्ज और फेयर टैरिफ लगाकर कमाई कर रही ओला, ऊबर, मायकैब जैसी टैक्सी सर्विस पर प्रदेश सरकार खासी मेहरबान है। यही कारण है कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम के आधार पर चलने वाली कैब-टैक्सी को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियम मंत्रालय की फाइलों में ही दफन हैं।
प्रदेश सरकार ने कैब-टैक्सी संचालन के पिछले साल 13 अक्टूबर को मप्र मोटर कैब, ऑटो रिक्शा तथा मोटर साइकिल भाड़े पर देने के लिए अनुबंधकर्ता (एग्रीगेटर) नियम 2017 का ड्राफ नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नियम पर 30 दिन यानी 13 नवंबर तक दावे-आपत्तियां और सुझाव बुलाए गए थे। एक माह के अंदर इन आपत्तियों को दूर कर फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाना था। लेकिन पिछले 5 माह से इन नियमों का नोटिफिकेशन परिवहन मंत्रालय की फाइलों से ही बाहर नहीं निकल पा रहा है।
अफसरों का तर्क... दूसरे राज्यों के नियमों का कर रहे हैं अध्ययन
13 अक्टूबर को बुलाए गए थे दावे अापत्तियां और सुझाव, दिसंबर में ही लागू होने थे नियम

ये नियम किए जाने हैं लागू
कैब के अंदर एक पैनिक बटन अनिवार्य होगा, खतरे की स्थिति में यात्री उसे दबा सकेगा। बटन दबते ही वाहन से एक हूटर बजेगा, जो दूसरे वाहन चालकों को खतरे का संकेत देगा। कैब की बुकिंग होते ही इंटरनेट सर्विस के जरिए ड्राइवर का फोटो, नाम, मोबाइल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, और किराए की जानकारी यात्री को भेजनी होगी। कैब सेंट्रल लॉक डिसेबल्ड होगी। इसमें महिला हेल्पलाइन नंबर और पुलिस हेल्पलाइन नंबर चस्पा रहेगा।
राज्य शासन तय करेगा किराया
इन नियमों के लिए मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की विभिन्न धाराओं में बदलाव कर 8 नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इनके मुताबिक कैब, ऑटो रिक्शा और किराए की मोटर साइकिल का किराया अब राज्य शासन तय करेगा।
इन टैक्सी संचालकों को सफर के समापन पर यात्रियों को तत्काल प्रिंटेड या इलेक्ट्रॉनिक बिल उपलब्ध कराना होगा, जिसमें यात्रा का संपूर्ण ब्यौरा, तय दूरी मय रूटमैप, फेयर चार्ज और यात्रा अवधि की जानकारी शामिल होगी।
नियम अभी विचाराधीन है
सभी दावे-आपत्तियों का निराकरण हो चुका है, लेकिन यह नियम अभी विचाराधीन है। दूसरे राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज की जानकारी मंगाई जा रही है। ताकि उन्हें समाहित कर वर्तमान परिस्थियों और जरूरतों के हिसाब से नियमों को और बेहतर बना सकें। नए सिरे से इसे एग्जामिन करने के बाद लागू करने का निर्णय लिया जाएगा। - मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव ट्रांसपोर्ट विभाग