दलहनों के भावों में नए सिरे से मंदी आने से घबराहट बढ़ी
दलहनों के भावों में नए सिरे से आ रही मंदी के बाद दाल मिलों, स्टॉकिस्टों और आढ़तियों में घबराहट पैदा हो गई है। भावों में मंदी के बाद लेवाल पीछे हटते जा रहे हैं। मसूर के आयात सौदे 4000 रुपए में हो गए हैं। तुअर चने की मंदी ने अन्य दलहनों के भावों की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। डबल-डॉलर में 200 से 300 रुपए की गिरावट रही। ऐसा आभास होता है कि किसानों को आने वाले महीनों में चना दाल मिलों व व्यापारियों को बेचना पड़ेगा।
चने का बंपर उत्पादन हुआ है। मप्र में 21 लाख टन चना खरीदी करना है। जिस तरह से एवं मापदंड से खरीदी की जा रही है, उससे ऐसा नहीं लगता है कि बड़ी मात्रा में चने की खरीदी हो सकेगी। इसका प्रभाव भावों पर पड़ना शुरू हो गया है। 3500 से 3525रुपए में चने के बेचवाल इधर-उधर घूम रहे थे, किंतु मिलें लेवाल नहीं बन रही थी। चना दाल में ग्राहकी सुस्त है। जब तक दालों में ग्राहकी नहीं निकलती है, दलहनों में सुधार आना कठिन है। तुअर में मांग कमजोर रहने से इंदौर डिलीवरी 4050 रुपए में बेचवाल आ गए हैं। मसूर की आवक नहीं के समान होने के बाद दाल में मांग नहीं है। ऐसा लगता है, मसूर दाल की खपत ही कम पड़ गई है।
गेहूं में ग्राहकी कम
गेहूं की आवक 8 हजार बोरी की रही । इस बार वार्षिक स्टॉक करने वाले उपभोक्ताओं की मांग भी ठंडी है। शरबती (चंदौसी) गेहूं की आवक के बाद ग्राहक टूट पड़ते थे, इस बार उपभोक्ता भाव तलाशकर चले जाते हैं। शरबती 2500 से 2800 मालवराज 1975 से 2000 पूर्णा 1850 से 1900 रुपए। मिल 1650 से 1700 रुपए बिक रहा है।