किसानों के पास रुपए की कमी से सोना-चांदी के आभूषणों में मांग अधिक नहीं
किसानों की फसलें नहीं बिकने, धन की तंगी, सोना महंगा होना आदि कई कारणों से अक्षय तृतीया पर सराफा बाजारों में पूर्व वर्षों की तरह ग्राहकी नहीं रही। औसत रूप से ग्राहकी 25 प्रतिशत ही चल सकी है। आगे अभी दो माह ब्याह-शादियों के मुहूर्त हैं। अत: कम ज्यादा ग्राहकी बनी रहने की आशा रखी जाती है। रूस, अमेरीका के बीच तनाव ठंडा पड़ने से सोने में बड़ी तेजी नहीं आ सकी। बड़े देश यह जानते हैं कि वे मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। यदि युद्ध होता है तो बाद में देश की अर्थ व्यवस्था संभालना कठिन हो जाएगा। बाजार से नकदी फिर से गायब होने लगी है। कुछ बैंकों में नकदी नहीं है और एटीएम भी खाली हैं। शेयर बाजार में बड़ी मंदी आए बिना सोने में निवेश बढ़ना कठिन है। आने वाले महीनों में ट्रेडवार क्या स्वरूप धारण करता है, यह भी विचारणीय है। कुछ विशेषज्ञ वर्ष 2018 में सोने के भाव 1400 डॉलर पार करने की राय व्यक्त कर रहे हैं। देखना है उनकी यह राय कितनी फलीभूत होती है।
एटीएम खाली नजर आए
व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार वर्ष में सबसे बड़ी वैवाहिक तिथि अक्षय तृतीया के अवसर पर सराफा बाजारों में मांग उतनी नहीं रही, जितनी पिछले वर्षों में रहती आई है। यह भी सही है कि नोटबंदी के बाद अब बाजारों में धीरे- धीरे ग्राहकी खुलने लगी है, किंतु इस बार राज्य सरकार ने पूरा बाड़ा बिगाड़ कर रख दिया है। गेहूं की खरीदी फिलहाल बहुत कम मात्रा में हो सकी है। उसका रुपया मिलने में काफी समय इंतजार करना पड़ेगा। सरसों, चना और मसूर की खरीदी 10 अप्रैल से शुरू की है। उसमें भी विशेष प्रगति नहीं हो सकी है। अत: किसानों के पास धन की तंगी होने के बाद ब्याह-शादियां कैसे संपन्न करें। बाजार में धन की तंगी फिर से दिखाई देने लगी है। बैंकों से रुपया मिलना तो कठिन है, वरन् अब एटीएम भी खाली नजर आने लगे हैं। यह स्थिति नोटबंदी के समय बनी थी। पिछले महीनों के ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ सराफा व्यापारी परिचित किसानों को उधारी में आभूषण दे रहे थे किंतु उनकी भी एक सीमा है। आखिर उधारी कब तक देते रहे।
अभी तनाव कम
अमेरिका रूस के बीच तनाव नहीं बढ़ सका, जिससे सोना-चांदी के भावों में विशेष तेजी नहीं आ सकी। यदि युद्ध जैसी स्थिति चाहे कुछ समय के लिए ही सही बन जाती तो सोने के भाव उछल सकते थे। विश्व के बड़े देश यह समझ रहे है कि वे मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। युद्ध होने के बाद स्थिति अधिक विस्फोट हो जाएगी। और देश संभालना मुश्किल हो जाएगा। उत्तर-कोरिया , अमेरिका के संबंध अभी तो सामान्य माने जा रहे हैं। उत्तर कोरिया का रूख फिलहाल नरम दिखाई दे रहा है। जिससे विश्व में तनाव जैसी स्थिति नहीं है। वैसे कुछ न कुछ तनाव तो हमेशा बना रहता है।
बैंकों में धन की कमी
बैंकों से नकद धन मिलने में कठिनाई की वजह से अनेक ग्राहकी नकद रुपया दबाकर बैठ गए हैं। रुपए का सक्युर्लेशन क्यों बिगाड़ रहा है, यह समझ से परे हैं। बताया जाता है कि बाजार में नकद मुद्रा अधिक मात्रा में दी गई है। इसके बाद स्पष्ट अलग हो रहा है कि आम जनता रुपया खर्च भी नहीं करना चाहती है और बैंकों में वर्षों पूर्व की तरह सामान्य व्यवहार भी नहीं कर रही है। केंद्र सरकार यह माने या न माने, किंतु आम जनता का बैंकों पर से विश्वास उठता जा रहा है। बड़े उद्योगों द्वारा बैंकों का रुपया लेकर वापस न लौटाने से मन:स्थिति में आशंका घर करने लग गई है। बैंकों की माली हालत के बारे में जब जनता को आम खुलासा हो जाएगा तो निश्चित ही कुछ बैंकों से विश्वास उठ सकता है। अनेक उद्योग संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इन उद्योगों बैंकों का अरबों रुपया फंसा हुआ है।
1400 डॉलर पार होगा?
कुछ विशेषज्ञ वर्ष 2018 में सोने के भाव 1400 डॉलर तक पहुंचने अथवा इससे ऊपर जाने की राय व्यक्त कर रहे हैं। उनका मत है कि शेयर बाजार में गिरावट आती है। और घटबढ़ बनी रहती है जो सोने के भावों में और भी तेजी आ सकती है। सोने में बड़ी तेजी आएगी या नहीं आ सकेगी। यह कहना कठिन है, किंतु वर्तमान में बाजारों में धन की तंगी बढ़ती जा रही है, यह तंगी अगले छह माह तक ऐसी ही बनी रही तो तेजी आना कठिन है। बाजारों की परिस्थितियों आए दिन विपरीत बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार 1335 से 1370 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक मजबूत आधार के रूप में काम कर सकता है।
अस्थिरता का माहौल
जानकारों का मानना है कि अमेरिका चीन के ट्रेडवार में सोने में निवेश हमेशा बढ़ता है। विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेडवार छिड़ने जैसे हालात अभी भी बने हुए हैं। इक्विटी जिंस बाजार दोनों को प्रभावित भी किया है। अस्थिरता का माहौल होने से सोने की तेजी का बल मिला है।1350 डॉलर के आसपास घूम रहा है। सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ी हो या न बढ़ी हो तो फंड वालों ने सोना उच्च स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। इसके अलावा अन्य धातु, ऊर्जा और कृषि उत्पादों के घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरावट आई है। विश्व में आधार धातुओं के सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन की तरफ से अमेरिकी आयात के प्रति दिखाई गई सख्ती से विश्व बाजारों में कारोबारी धारणा को बड़ा झटका दिया है। सोने की सर्वाधिक मांग चीन की रहती है। हाल ही में ट्रेड वार शुरू करने के बाद क्या स्थिति बनेगी। चीन में नए वर्ष के समय सोने में मांग अधिक रहती है। वह भी समाप्त हो गई है। भारत द्वारा दलहन के आयात पर रोक का प्रभाव आने वाले महीनों में चीनी अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है यह विचारणीय है।
एक बार फिर से सोना 32000 रुपए के पार
रुपए की कमजोरी, कॉमेक्स एक्सचेंज में सोने के वायदे बढ़ जाना, ब्याह-शादियों की आंशिक मात्रा में मांग से सोने के भावों में तेजी आ गई है। इंदौर में सोना 32000 रुपए से उपर निकल गया है। इसकी वजह से मांग कुछ कमजोर पड़ी है। अप्रैल माह में होने वाले मुहूर्त के लिए सोने- चांदी के आभूषणों की बिक्री लगभग पूरी हो चुकी है। मई -जून में जो मुहूर्त है, उनकी खरीदी चल रही थी, तेजी के बाद ग्राहकी अटकी है। इंदौर सराफा बाजार की स्थिति तो कुछ दिन ऐसी रही है कि बाजार में पैर रखने की जगह नहीं थी किंतु ग्राहकी 25 प्रतिशत ही चल रही थी। शहर के कुछ शोरूम्स पर ग्राहकी ठीक रही जबकि कुछ शोरूम्स में वर्षों से खरीदी करने जाते रहे हैं, वहीं जा रहे थे। पता नहीं एक-दो इलेक्ट्रानिक मीडिया को कब पता चलेगा कि लग्न के मुहूर्त के दिन आभूषण खरीदने नहीं जाते हैं। यह तैयारी काफी पहले कर ली जाती है। अक्षय तृतीया के दिन या एक दिन पहले बिक्री में वृद्धि कोरी कल्पना कहीं जा सकती है।