42 से अधिक वर्षीतप आराधकों ने किए पारणे
मोहनखेड़ा तीर्थ पर बुधवार को 42 से अधिक वर्षीतप आराधकों के पारणे किए गए। आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी आदि ठाणा की निश्रा में वर्षीतप के सभी आराधक द्वारा जय तलेटी पर गिरिराज की सामूहिक वंदना कर श्री शत्रुंजयावतार तीर्थाधिपति भगवान आदिनाथ प्रभु की जिन प्रतिमा पर इक्षु रस से अभिषेक लाभार्थी श्री चम्पालालजी झुमरमलजी वेदमुथा परिवार आहोर/भिवंडी द्वारा किया गया। 2 साधु, 7 साध्वी व 33 श्रावक-श्राविकाओं ने वर्षीतप का पारणा किया। विशेष रूप से आनन्दधनसूरीश्वरजी के समुदाय के उपाध्याय दिव्यचन्द्रविजयजी, आचार्य लब्धिचन्द्रसूरीश्वरजी के शिष्य मुनि प्रसन्नचन्द्रविजयजी, आचार्य आनन्दऋषिजी व आचार्य शिवमुनिजी के आज्ञानुवर्ती साध्वी चन्दनबालाश्रीजी, साध्वी विश्ववंदनाश्रीजी, साध्वी त्रिकालवंदनाश्रीजी, साध्वी वितरागवंदनाश्रीजी, साध्वी चारुप्रज्ञाश्रीजी, परमेष्ठीवंदनाश्रीजी एवं आचार्य जयंतसेनसूरीश्वरजी के आज्ञानुवर्ती भाग्यकलाश्रीजी व स्थानकवासी समुदाय से साध्वीजी ने वर्षीतप का पारणा मोहनखेड़ा तीर्थ पर किया।
काया क्षण भंगुर : आचार्यश्रीजी : अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आचार्य श्रीमद्विजय ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी कहा कि काया क्षण भंगुर है। अपने जीवन में अंतराय कर्मों को क्षय करने का वर्षीतप की आराधना उत्तम साधन है। प्रभु आदिनाथ भगवान ने अपने पूर्व जन्म में किसान को अपने बैलों के मुख पर छीका बांधने की सलाह दे दी थी, जिसके कारण प्रभु को अपने अगले जन्म में मुनि जीवन में उपवास के बाद 400 दिनों तक शुद्ध आहार, गोचरी उपलब्ध नहीं हो पाई। यही अंतराय कर्म प्रभु के जीवन में बंध गया था। तभी से यह वर्षीतप की आराधना का क्रम निरन्तर चला आ रहा है। वर्तमान में दादा गुरुदेव के पाटोत्सव के 150 वर्ष, क्रियोद्धार दिवस के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे है और दादा गुरुदेव को तप के माध्यम से भावांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से मोहनखेड़ा तीर्थ से सामूहिक वर्षीतप आराधना करने का आह्वान किया गया था। मैंने कोंकण क्षेत्र में विहार किया मुम्बई भायन्दर जब प्रथम आगाज किया गया तब भायन्दर में 600 आराधकों ने आराधना करने का मन बना लिया पर स्थानाभाव के कारण भायन्दर में 342 लोगों को आराधना करने की अनुमति दी गई। उसी क्रम में बिजापूर में 180 आराधक, पूना में 101 आराधक, उमरगांव में 71 आराधक, विशाखापट्टनम् में 70 आराधक, कामसेट में 51 आराधक, राजगढ़ में 51 आराधक व कोठारी परिवार के प्रयासों से दुबई में 72 आराधक वर्षीतप की आराधना करते हुए अगले वर्ष मोहनखेड़ा तीर्थ में 1000 अधिक आराधकों के साथ दादा गुरुदेव को अपनी भावांजलि अर्पित करते हुए पारणा करेंगे। वर्ष 2014 में आचार्य श्री शिवमुनिजी ने भी अपने 22वें वर्षीतप का पारणा मोहनखेड़ा महातीर्थ पर किया था। उस समय यहां 68 पारणे हुए थे। हमारा जैन समाज भले ही बंधनों में बंधा हुआ हो पर तीर्थ किसी के बंधन में नहीं है यहां पर कोई भी आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका वर्षीतप की आराधना करते हुए यहां पारणा कर सकता है, यह तीर्थ सभी के लिए खुला है। आज बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-साध्वी व श्रावक-श्राविकाओं ने अपने अंतराय कर्मो की निर्जरा करते हुए अपने वर्षीतप की आराधना को पूर्ण कर पारणा किया।
वर्ष 2018 के अक्षय तृतीया के अवसर पर श्रेयांसकुमार बनकर सभी साधु-साध्वी एवं श्रावक-श्राविकाओं को गन्ने के रस से पारणा कराने का लाभ धुम्बडिया निवासी श्रीमती फाउदेवी कालुचंदजी फोलामुथा परिवार द्वारा लिया गया। आचार्यभगवन्त, साधु-साध्वी भगवन्त को गुरु पूजन कर समस्त तपस्वियों के बहुमान का लाभ धुम्बडिया निवासी सुमेरमलजी हस्तीमलजी रांका परिवार (रांका ग्रुप) द्वारा लिया गया।
मोहनखेड़ा तीर्थ पर प्रवचन देते आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी
लाभार्थियों का बहुमान किया
आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सुजानमलजी सेठ, मांगीलाल पावेचा, संजय सराफ, आनन्दीलाल अम्बोर आदि ने ट्रस्ट की ओर से समस्त लाभार्थी परिवारों का बहुमान किया। इस अवसर पर धुम्बडि़या, देवड़ा, वागोड़ा, भीनमाल, दादाल, मोरसीम, दासपा, हरजी, आहोर, कोरा, रतलाम, जावरा, मंदसौर, नीमच, प्रतापगढ़, मुंबई, भिवंडी, काकीनाड़ा, उज्जैन, इन्दौर, झाबुआ, कुक्षी, राणापुर, राजगढ़ सहित अनेक स्थानों के श्रीसंघों की उपस्थिति रही। अक्षय तृतीया के अवसर पर पधारे हुये समस्त साधार्मिक बन्धुओं के लिए गन्ने के रस से स्वामीभक्ति का लाभ शांतिदेवी भंवरलालजी भंसाली बागोड़ा एवं मिन्टूकुमार सायरमल वेदमुथा सांचोर परिवार द्वारा लिया एवं सुबह नास्ता एवं दोनों समय की नवकारसी का लाभ विमलकुमार घेवरचंद मुथा परिवार सिकन्दराबाद द्वारा लिया गया।