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शहर के 166 बच्चे 5 साल से लापता ढूंढे बिना ही पुलिस ने बंद कर दी जांच

3 वर्ष पहले
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नाबालिग और बच्चों के अपहरण के मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। केस दर्ज करने के बाद भी पुलिस इनकी तलाश नहीं करती, इससे मामले लंबित होते जाते हैं। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि अादिवासी बहुल क्षेत्र अालीराजपुर में नाबालिग बच्चों के अपहरण के सभी मामले ट्रेस हो चुके हैं, जबकि संभाग के सभी अाठ जिलों में सबसे ज्यादा मामले इंदौर में लंबित हैं। यहां 166 बच्चों को पांच साल में पुलिस नहीं ढूंढ सकी। बाकी सात जिलों में बच्चों के लापता होने और नहींं मिलने के मामलों की संख्या 191 है।

पुलिस गंभीरता नहीं दिखाती, सालों तक अटका रखती है जांच

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर नाबालिग की गुमशुदगी के मामले में पुलिस अपहरण का केस दर्ज करे। इसके पीछे उद्देश्य था कि पुलिस गुमशुदगी कायम करने के बाद उतनी गंभीरता नहीं दिखाती और सालों तक कोई जांच नहीं की जाती। अपहरण का केस दर्ज होने से गंभीरता आएगी और मामलों का निराकरण होगा। इस आदेश के पालन में पुलिस ने ताबड़तोड़ अपहरण के सैकड़ों मामले दर्ज तो कर लिए, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं की। इससे पेंडेंसी बढ़ती गई। इसे लेकर जिम्मेदारों से भास्कर ने बात की तो यह बताया गया कि पेेंडेंसी सिर्फ आदिवासी क्षेत्रों में है, क्योंकि वहां प्रथा के अनुसार लड़के-लड़कियां भागकर शादी कर लेते हैं। बाद में वे घर नहीं लौटते और केस पेंडिंग रह जाता है। परिजन भी पुलिस को सूचना नहीं देते, क्योंकि उनका भी अपना हित रहता है।

पुलिस का तर्क-बच्चे बड़े हो गए होंगे

ज्यादातर मामलों में थाने के स्टाफ ने यह मान लिया है कि बच्चे अब नहीं मिलेंगे। उनका अनुमान है कि बच्चे बड़े हो गए होंगे या गिरोह के हत्थे चढ़ गए होंगे। यह रवैया ही हैरान करने वाला है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में जांच अधिकारियों के पास गायब बच्चों के फोटो भी नहीं हैं।

इंदौर जोन के आठ जिलों की अलग-अलग कहानी

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हो रहा अच्छा काम

भास्कर ने इंदौर जोन के आठ जिलों इंदौर, धार, झाबुआ, अालीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और बुरहानपुर के आंकड़ों की जानकारी निकाली तो अलग ही कहानी निकली। आदिवासी बहुल क्षेत्र आलीराजपुर में मार्च 2018 तक नाबालिग के अपहरण का एक भी मामला लंबित नहीं है। ऐसे ही झाबुआ में सिर्फ 29 पेंडिंग हैं। इससे साबित होता है कि वहां की पुलिस ने बेहतर काम किया और सारे मामलों का निराकरण कर दिया।

आदेश : चार महीने बाद जांच की जिम्मेदारी सीएसपी को

दो साल पहले पुलिस मुख्यालय ने इन मामलों की तफ्तीश में गंभीरता लाने के लिए एक आदेश निकाला था। इसके तहत नाबालिगों के अपहरण के लंबित मामलों में चार महीने की समयावधि पूरी होने के बाद इसकी जांच स्वत: क्षेत्रीय सीएसपी के जिम्मे हो जाएगी।

संभाग में अपहरण के 357 मामले

जिला लंबित प्रकरण

इंदौर पूर्व 63

इंदौर पश्चिम 103

धार 58

झाबुआ 29

अालीराजपुर 0

खरगोन 34

बड़वानी 12

खंडवा 46

बुरहानपुर 12

एडीजी बोले : हम समीक्षा कर रहे हैं, बच्चों को जल्द ढूंढ निकालेंगे

धारा-363 के प्रकरणों की समीक्षा सीएसपी के साथ एएसपी और एसपी स्तर के अफसर कर रहे हैं। हम खात्मा इसलिए नहीं करते, ताकि बच्चों की तलाश लगातार चलती रहे। पेंडेंसी सैकड़ों में थी, जिसे हमने लगातार काम कर कम किया है। हमारा प्रयास है कि सभी मामलों का जल्द से जल्द निराकरण हो जाए। - अजय कुमार शर्मा, एडीजी इंदौर

सीएसपी बोले: ऐसे मामलों में हटो और बचो का पैंतरा है हमें जांच सौंपना, स्टाफ तो है ही नहीं

भास्कर ने प्रकरणों की जांच करने वाले सीएसपी से मामलों के लंबित होने का कारण पूछा तो कुछ ने बताया कि सीएसपी को जांच देना हटो-बचो का पैतरा है। यह इसलिए है, क्योंकि सीएसपी के पास अलग से स्टाफ तो तैनात है नहीं। उन्हें जो भी कार्रवाई करवाना है, थाने के स्टाफ से ही करवाना होती है। ऐसे में थाने के स्टाफ को लगातार निर्देशित करने के बाद भी रिजल्ट नहीं आता। ज्यादातर स्टाफ गंभीरता नहीं लेता और प्रकरण लंबित ही रह जाता है।

तर्क... इसलिए नहीं मिल रहे हैं बच्चे

जांच करने वाले अधिकारियों का एक तर्क यह भी है कि जो प्रकरण लंबित हैं, उनमें पूरी जांच हो चुकी है। अब अधिकारियों को खात्मा पेश करने की मंजूरी दे देना चाहिए, भले ही गुमशुदगी को बंद नहीं करें। जितने भी बच्चे लापता हुए हैं, उनके न तो पालक मिल रहे हैं और न कहीं जानकारी आ रही है। ऐसे में जांच में आगे कोई प्रगति नहीं हो रही है।

डीजीपी ने शुरू किया है विशेष अभियान

नाबालिगों के अपहरण को लेकर डीजीपी ने 1 मई से विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत इन्हीं मामलों पर पुलिस को सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करना है, ताकि पेंडेंसी को कम किया जा सके और अपराध का निराकरण हो सके।

जबकि पश्चिमी इंदौर में सबसे ज्यादा 103 केस पेंंडिंग

आठ जिलों में लंबित नाबालिग के अपहरण के मामलों (धारा-363) की समीक्षा करने पर खुलासा हुआ कि सबसे ज्यादा लंबित प्रकरण इंदौर में 166 हैं। इंदौर में दो एसपी पूर्व और पश्चिम हैं। पश्चिम में सर्वाधिक पेंडेंसी 103 प्रकरणों की है।

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