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कश्मीर में अब सुरक्षा बलों की आतंकियों को जिंदा पकड़ने की रणनीति

3 वर्ष पहले
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जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल अब आतंकियों को जिंदा पकड़ने की रणनीति अपनाने जा रहे हैं। इसका मकसद आतंकी गुटों में नए शामिल होने वाले युवाओं की घर वापसी कराना और मुख्यधारा में वापस लाना है। सुरक्षा बलों ने पिछले सात महीनों में 70 से अधिक आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया है।

वरिष्ठ अधिकारियों मुताबिक इस रणनीति का उद्देश्य आतंकवादियों के लिए जमीन पर काम करने वालों के नेटवर्क को खत्म करना है जो युवाओं को कट्टर बनाकर उन्हें जिहाद में धकेलने के लिए जिम्मेदार हैं। आतंकवाद निरोधक अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य उन्हें जिंदा पकड़ना और उनकी शिकायतों को समझना है। आखिरकार 15 या 16 वर्ष के किशोर का इस सीमा तक ‘ब्रेनवॉश’ नहीं किया जा सकता कि वह मुठभेड़ में मरना चाहे। इसका कोई तो हल होगा।’

अधिकारियों ने कहा कि रमजान के दौरान सुरक्षा बलों के ऑपरेशंस को रोकने के सरकार के फैसले से पहले सद्दाम पोद्दार, इसा फजल और समीर टाइगर जैसे कट्टर आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने की जरूरत थी। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन में युवाओं को शामिल करने के पीछे उनका ही दिमाग काम कर रहा था।

सीनियर पुलिस अफसर ने कहा, ‘खुफिया सूचनाएं मिली हैं कि कई युवा घर वापस लौटना चाहते हैं। कुछ अभिभावकों ने भी बताया है। हम चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन और शिक्षा फिर से शुरू करें।’ ऑपरेशन रोकने से अभिभावकों को अपने बच्चों को वापस लाकर पढ़ाई में लगाने के लिए मनाने में मदद मिलेगी। कश्मीर रेंज के आईजी स्वयं प्रकाश पाणि ने कहा, पिछले 7 महीनों में आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि एक अपने परिवार के पास लौट आया।

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