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छात्रों को दो राज्यों में अलॉट हो गई सीटें, अब खाली हो रहे मेडिकल कॉलेज

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेज के लिए हो रही काउंसलिंग में चिकित्सा शिक्षा विभाग (डीएमई) की लापरवाही निजी कॉलेजों द्वारा प्रवेश में गड़बड़ी किए जाने की जमीन तैयार कर रही है। डीएमई ने भी इस बात की जांच नहीं की कि छात्र ने दूसरे राज्यों में भी रजिस्ट्रेशन तो नहीं करवाया है। ऐसी लापरवाही का फायदा उठाकर कई छात्रों ने दो-दो राज्यों के सरकारी कॉलेजों में सीट अलॉट करवाई। अब दूसरे राज्यों में प्रवेश लेने या ऑल इंडिया कोटा में जाने के चलते प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 20% से ज्यादा सीटें फिर खाली हो गई हैं। सेकंड राउंड की काउंसलिंग में यह सीटें भले ही भर जाएं, लेकिन इसका फायदा निजी कॉलेजों को मिलेगा। वे प्रवेश प्रक्रिया को अंतिम तारीख 30 सितंबर तक खींचेंगे, ताकि तब सीटें खाली बताकर कॉलेज लेवल काउंसलिंग में मनमाने ढंग से प्रवेश दे सकें।

इधर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पहली काउंसलिंग के बाद 150 सीट अलॉट कर दी थी, पर 10 छात्र ऑल इंडिया कोटा का उपयोग कर दूसरे राज्य चले गए। कई ऐसे छात्र भी थे, जिन्हें उप्र,राजस्थान में भी सीटें अलॉट कर दी गई थी। उन्होंने अपने राज्य में प्रवेश ले लिया, इससे एमजीएम में राज्य कोटे की 25 सीटें खाली हो गई हैं। हालांकि ये भी आगे भर जाएंगी।

हर राज्य में मूल निवासी नियम अलग, इसका मिल रहा लाभ

अलग-अलग राज्यों में मूल निवासी को लेकर अलग नियम हैं। ऐसे छात्र जिन्हें, मप्र का मूल निवासी होने के कारण प्रवेश मिला है, उन्हें राजस्थान में इस आधार पर प्रवेश मिला, क्योंकि उनके पिता वहां नौकरी करते हैं। ऐसे छात्रों ने दो राज्यों में रजिस्ट्रेशन करवाया, अब वह मप्र में सीटें छोड़ रहे हैं।

1. खुशी मंदिरीता- इसके पिता राजस्थान राज्य परिवहन में नौकरी करते हैं, इस वजह से सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर में सीट अलॉट हुई। चूंकि छात्रा के पिता श्योपुर, मप्र के निवासी हैं, इसलिए इंदौर के एमजीएम कॉलेज में भी सीट अलॉट हो गई। अब इसने जयपुर में प्रवेश लिया।

2. श्योपुर से 10वीं 12वीं करने वाली दीपांजलि गुप्ता के अभिभावक राजस्थान में नौकरी करते हैं। इस आधार पर उसे वहां चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी सीट अलॉट की। मप्र के मूल निवासी प्रमाण पत्र के आधार पर यहां एमजीएम में सीट मिल गई। अब दीपांजलि ने ऑल इंडिया कोटे के तहत कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया है।

रजिस्ट्रेशन की जांच करते तो पकड़ में आती धांधली

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के रजिस्ट्रेशन के लिए समयसीमा तय कर रखी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग को सीधे अलर्ट करने के पहले कम से कम पड़ोसी राज्यों की सूची से मिलान करना चाहिए कि कहीं छात्र ने दूसरी जगह तो आवेदन नहीं किया है। मप्र की सूची में कई ऐसे नाम हैं, जिनके नाम राजस्थान, उप्र के कॉलेजों में भी हैं।

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