रजिस्ट्री होते ही ऑनलाइन होगा नामांतरण का आवेदन
राजस्व को कनेक्ट करने के लिए तैयार हो रहा सॉफ्टवेयर
भास्कर संवाददाता | धार
जमीनों का सरकारी रेट तय करने के लिए बनाई जाने वाली कलेक्टर गाइडलाइन में संशोधन का काम किया जा रहा है। दरअसल, 1 अप्रैल को लागू होने वाली गाइडलाइन को इसलिए लागू नहीं किया क्योंकि इसमें कुछ बदलाव किए जाने हैं। हाल में ही गाइडलाइन के नियम में एक बदलाव सामने आया है। इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है। इस बदलाव के तहत अब खेती की जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले किसानों को तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रजिस्ट्री होते ही नामांतरण के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस से ऑनलाइन उनका आवेदन तहसील कार्यालय में पहुंच जाएगा।
गाइडलाइन के तहत मई से नए साॅफ्टवेयर के जरिए संपदा और राजस्व सॉफ्टवेयर को जोड़ने के लिए प्लानिंग शुरू है। इस प्लानिंग में फिलहाल केवल खेती की जमीन को लेकर हुई रजिस्ट्री के नामांतरण को शामिल किया गया है। हालांकि नामांतरण विवादित है या अविवादित, इसका अंतिम निर्णय तहसीलदार करेंगे। अभी तक रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण आवेदन की प्रोसेस तहसील कार्यालय में करनी होती है। इसमें रजिस्ट्रीकर्ता को ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते थे। अब रजिस्ट्री के बाद संबंधित तहसीलदार के पास रजिस्ट्रीकर्ता का आवेदन डिस्प्ले होने लगेगा। इस व्यवस्था के बाद संबंधित व्यक्ति का काम जल्दी हो सकेगा।
खेती की जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद किसानों को नामांतरण के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर
नामांतरण के सबसे ज्यादा प्रकरण
नामांतरण को लेकर धार जिले में सबसे ज्यादा प्रकरण लंबित है। ऐसे अविवादित प्रकरण को हल करने के लिए तहसीलदारों को 30 दिन का समय शासन स्तर से तय किया गया है। संख्या ज्यादा होने के कारण प्रकरण लंबित होते जाते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए यह साॅफ्टवेयर लाया जा रहा है, ताकि प्रकरणों की संख्या कम हो सके और उनका समय पर निराकरण हो जाए।
ऐसे काम करेगा सॉफ्टवेयर
खेती की जमीन की ई-रजिस्ट्री होने के साथ ही वेबसाइट पर नामांतरण का एक विकल्प होगा। इससे किसानों को तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। पंजीयक पूरी कार्रवाई के बाद नामांतरण विकल्प पर क्लिक किया जाएगा। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। क्लिक करने के साथ ही आवेदन राजस्व वेबसाइट पर अपडेट हो जाएगा। इसी दिन से आवेदन की तारीख मानी जाएगी।