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रोडरेज : सिद्धू गैर-इरादतन हत्या में बरी, मारपीट मामले में एक हजार रु. का जुर्माना

3 वर्ष पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराने रोडरेज मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को गैर-इरादतन हत्या के आरोप से बरी कर दिया है। हालांकि उन्हें मारपीट मामले (आईपीसी की धारा 323) में दोषी माना और इसके लिए उन पर सिर्फ एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। सिद्धू के मित्र रुपिंदर सिंह संधू को दोनों ही धाराओं में सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया है। जस्टिस जे चेलमेश्वर और संजय किशन कौल की बेंच ने 18 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। 1988 में पटियाला में हुए इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या एवं चोट पहुंचाने का दोषी ठहराते हुए तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। सिद्धू ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शेष|पेज 4 पर





12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने सिद्धू को रोडरेज की घटना में दोषी बताया था। पंजाब सरकार के वकील ने कहा था कि 2006 में हाईकोर्ट से सिद्धू को मिली सजा को बरकरार रखा जाए।

यह थी घटना : 27 दिसंबर 1988 में सिद्धू का पटियाला में कार से जाते समय गुरनाम सिंह नामक बुजुर्ग से झगड़ा हुआ था। आरोप है कि हाथापाई से घायल गुरनाम सिंह की बाद में मौत हो गई। पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्‍या का मामला दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 1999 को अपने फैसले में सिद्धू को हत्या के मामले में बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया था।

मैं जब-जब संकट में होता हूं, तब-तब ऊपर वाला मेरी मदद करता है। यह परमात्मा की परम कृपा है और लाखों-करोड़ों लोगाें की दुआओं का असर है। अब हर सांस पंजाब के लिए है। - नवजोत सिंह सिद्धू, पर्यटन मंत्री, पंजाब

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