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असीमानंद सहित 5 आरोपी बरी फैसले के बाद जज का इस्तीफा

3 वर्ष पहले
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स्वामी असीमानंद सहित मक्का मस्जिद ब्लास्ट के पांच आरोपियों को स्पेशल एनआईए कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एनआईए एक भी आरोप साबित नहीं कर पाई। फैसला सुनाने के कुछ घंटे के बाद ही एनआईए के स्पेशल जज रवींद्र रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे के पीछे निजी वजह बताई है, लेकिन इसकी टाइमिंग पर विवाद शुरू हो गया।

चार सदी पुरानी मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त रिमोट कंट्रोल से हुए ब्लास्ट में नौ लोग मारे गए थे। विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की गोली से पांच और लोग मारे गए थे। शेष | पेज 4 पर









कोर्ट के फैसले के मद्देनजर हैदराबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। अप्रिय घटना रोकने के लिए तीन हजार जवान तैनात थे। ब्लास्ट की शुरुआती जांच हैदराबाद पुलिस ने की थी। उसके बाद सीबीआई को जांच सौंप दी गई थी। 2011 में एनआईए ने यह केस संभाला। इस केस में सीबीआई ने एक चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि एनआईए ने दो सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की थीं। पांचाें आरोपियों के बरी होने पर एनआईए ने कहा कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा।



असीमानंद ने बयान में कहा था- हिंदू धर्मस्थलों पर हमलों से गुस्से में थे, अदालत में मुकरा; यहीं से कमजोर हुआ एनआईए का केस

स्वामी असीमानंद का 2010 का इकबालिया कबूलनामा चार्जशीट का एक अहम हिस्सा था। इसके अनुसार हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हो रहे हमलों से आरोपी गुस्से में थे। बदले के लिए उन्होंने मुस्लिमों के धर्मस्थलों पर हमलों की साजिश रची। मुस्लिमों की ज्यादा भीड़ वाले स्थानों पर हमलों की योजना थी। चार्जशीट के अनुसार असीमानंद ने दिल्ली में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया था। इसमें उसने मक्का मस्जिद सहित विभिन्न जगहों पर धमाकों की साजिश का खुलासा किया था। हालांकि, बाद में वह अपने इस बयान से मुकर गया था। इस केस में 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे। 411 दस्तावेज भी पेश किए गए।

असीमानंद के वकील जेपी शर्मा ने कहा कि सभी सबूत और दस्तावेज जांचने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची कि कोई आरोप साबित नहीं होता। सारा मामला असीमानंद के इकबालिया बयान पर आधारित था। लेकिन हमारी शुरू से ही दलील थी कि यह इकबालिया बयान नहीं है। भगवा आतंकवाद की थ्योरी खड़ी करने के लिए यह बयान जबरन लिया गया था। शर्मा के अनुसार कोर्ट ने भी माना कि असीमानंद का बयान स्वैच्छिक नहीं था। दिसंबर, 2010 में असीमानंद के पुलिस हिरासत में होने के दौरान सीबीआई ने दिल्ली में यह बयान दर्ज किया था। उनका दावा है कि संत समाज की छवि बिगाड़ने के लिए सीबीआई ने जानबूझकर इन लोगों को फंसाया था। किसी आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई और न ही असीमानंद के इकबालिया बयान की पुष्टि हो पाई।



गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी बोले- हिंदू आतंकवाद का एंगल नहीं था

गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा, “मुझे इसी फैसले की उम्मीद थी। सारे सबूत मनगढ़ंत थे। इस केस में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई एंगल नहीं था।’ उल्लेखनीय है कि मणि ने 2016 में दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान उन पर दबाव डालकर इशरत जहां केस में दूसरा हलफनामा दाखिल करवाया गया था, जिसमें इशरत और साथियों के लश्कर से संबंधों की बात हटा दी गई थीं।

स्वामी असीमानंद

‘हिंदू आतंकवाद’ के दूसरे मामले में असीमानंद बरी, समझौता ब्लास्ट केस में अभी जमानत पर

हिंदू आतंकवाद के नाम पर यूपीए सरकार के वक्त गिरफ्तार किए गए स्वामी असीमानंद को दूसरे मामले में राहत मिली है। 2007 के अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में भी पिछले साल मार्च में जयपुर की अदालत ने उसे बरी कर दिया था। अभी 2007 के समझौता ब्लास्ट केस में वह आरोपी है। असीमानंद को सीबीआई ने 2010 में गिरफ्तार किया था। 2017 में उसे जमानत मिल गई।

भगवा आतंकवाद पर फिर छिड़ी सियासत; कांग्रेस ने कहा- एनआईए जांच पक्षपाती, भाजपा बोली- माफी मांगें सोनिया और राहुल

मक्का मस्जिद केस के पांच आरोपी बरी होने के साथ ही भगवा आतंकवाद के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पी चिदंबरम और सुशील शिंदे जैसे नेताओं ने भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल कर हिंदुओं का अपमान किया था। इसके लिए सोनिया और राहुल गांधी माफी मांगें। वहीं, कांग्रेस ने एनआईए की जांच को पक्षपाती बताया है। पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सभी जांच एजेंसी केंद्र सरकार की कठपुतली बन गई हैं। कांग्रेस के ही नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि दर्जनों गवाह मुकर गए हैं। इस पर सवाल तो खड़े होते ही हैं। इसी बीच, एआईएमआईएम के नेता और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एनआईए ने सही पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा, “जून 2014 के बाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट में अधिकतर गवाह मुकर गए। आपराधिक मामले में जबतक ऐसी पक्षपाती चीजें होती रहेंगी तब तक न्याय नहीं मिलेगा।’

कुल 10 आरोपी; पांच बरी हुए, एक की हत्या, दो अब तक फरार

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में 10 आरोपी थे। मुकदमा सिर्फ पांच पर चला। मुकदमे के बाद वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख स्वामी असीमानंद, बिहार के आरएसएस प्रचारक देवेंद्र गुप्ता, मध्यप्रदेश के आरएसएस कार्यकर्ता लाेकेश शर्मा के अलावा भरत मोहनलाल रातेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को बरी कर दिया गया। एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या कर दी गई। दो आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसांगरा अभी फरार हैं। दाे आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है।

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