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जिस पुजारी के नाम से चार एकड़ सरकारी जमीन का केस लड़ा, उसकी हो चुकी है मौत

3 वर्ष पहले
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ये भी सड़क का हिस्सा : लसूड़िया के जिस खसरे में ट्रस्ट की गतिविधियां चल रही हैं, वहीं से मास्टर प्लान की सड़क एमआर-11 निकलना प्रस्तावित है।

एमआर-11 की सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला, प्रशासन ने शुरू की जांच

विशेष संवाददाता | इंदौर

एमआर-11 की 150 करोड़ की सरकारी जमीन के लिए जिस पुजारी के नाम पर कोर्ट में बरसों केस चला, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। लोगों ने उसी जमीन पर कुछ धार्मिक स्थल और गोशाला बना दी है। लसूड़िया क्षेत्र की इस सरकारी जमीन और मास्टर प्लान की सड़क पर हो रहे कब्जे का खुलासा भास्कर ने किया तो अफसर हरकत में आए। संभागायुक्त ने अफसरों को मामले की पड़ताल करने के आदेश दिए हैं। चूंकि शनिवार को प्रशासनिक अफसर आंबेडकर जयंती कार्यक्रम में जुटे थे, इसलिए मौका-मुआयना नहीं हो सका, पर कलेक्टोरेट में जमीन से जुड़ी फाइलों की तलाश चलती रही। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिन पूजनदास उदासी के केस में 2005 में जमीन की एकपक्षीय डिक्री हुई, उसमें प्रशासन की आेर कोर्ट में अपना पक्ष ही नहीं रखा गया। जमीन के नामांतरण की फाइल जरूर अफसरों ने रोकी, लेकिन बाद में इसे बचाने के लिए न अपील की और न ही कब्जे हटाने की कार्रवाई। इसकी वजह से यहां कई कब्जे हो गए हैं।

अलाइनमेंट बदलने में हो गई गड़बड़ी

मास्टर प्लान में एमआर-11 जिस हिस्से में दर्शाई गई थी, उसको लेकर कई पेंच थे। सबसे अहम बात ये थी कि सड़क लसूड़िया से शुरू होकर बायपास से सीधे नहीं जुड़ रही थी। लिहाजा, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने बाद में इसमें बदलाव किया। इससे सुखलिया, गौरीनगर के साथ निरंजनपुर में कुछ जमीनें बाधित हुई। अलाइनमेंट बदलने का फायदा उठाकर कई लोगों ने जमीन पर कब्जे कर लिए।

सड़क बनेगी तो खाली कर देंगे जमीन

इधर, 4 एकड़ सरकारी जमीन पर जिस ट्रस्ट की आड़ में कब्जा हुआ है, उससे जुड़े किशनलाल पाहवा का कहना है कि हम उस जमीन पर कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला रहे। वहां समाजसेवा के उद्देश्य से काम कर रहे हैं। एक गोशाला बनी हुई है, जब भी सड़क बनेगी, हम जमीन खाली कर देंगे। पाहवा ने भी स्वीकार किया कि जिस पुजारी के नाम पर मुकदमा लड़ा गया था, वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

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