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67 साल के वोज्नियाक बोले- 20 साल का था तभी समझ गया था कि जिंदगी में असली खुशी कैसे मिल पाएगी
एपल के को-फाउंडर वोज्नियाक बोले- खुश रहना है तो जीवन में सिर्फ एक आदमी के प्रति जवाबदेह बनिए- खुद के ही प्रति
मैं काम को दफ्तर से बाहर लेकर नहीं जाता, आज तक फोन में एपल एप डाउनलोड नहीं किया
जब मैं 20 साल का था, तभी मैंने जिंदगी में खुश रहने का अपना एक फॉर्मूला बनाया। खुशी का ये फॉर्मूला था- मुस्कान में से गम को हटाओ। बात साफ है कि- जब हमारी कार पर कोई स्क्रैच लग जाता है तो क्या हम जिंदगी भर उसका गम मनाते रहते हैं? नहीं। हम जल्द से जल्द अपनी कार को ठीक कराते हैं और थोड़ी सावधानी के साथ वापस इसकी सवारी का आनंद लेने लगते हैं। जिंदगी भी इसी तरह चलती रहती है। मेरे पास बहुत पैसा है, खुद की बोट है, लेकिन अगर मैं ये सब रखे रहूं और आज मर जाऊं तो इतनी दौलत का क्या फायदा। लेकिन अगर मैं अपने दोस्तों के साथ मजाक करूं, परिवार के साथ वक्त बिताऊं और आज मर जाऊं तो कोई मलाल नहीं रहेगा। मेरा काम करने का तरीका भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। मैं दफ्तर के काम को कभी भी बाहर लेकर नहीं जाता। यही वजह है कि मेरे फोन में आज तक एपल स्टॉक एप डाउनलोड नहीं है। मैं ये नहीं चाहता कि दोस्तों के साथ बैठकर फोन पर एपल के शेयर खरीदता-बेचता रहूं या टेक्नोलॉजी के बारे में बातें करता रहूं। सच तो ये है कि मैंने और स्टीव ने पैसे कमाने के लिए ये काम नहीं शुरू किया था। इससे हमें संतुष्टि मिलती थी। प्रोडक्ट हिट हुआ तो खुद-ब-खुद पैसा आया। मैं ये तो नहीं कहूंगा कि मुझे कभी चिंता होती ही नहीं। मुझे भी चिंता होती है, लेकिन मैं इसे खुद पर हावी नहीं होने देता। मैं आखिरी बात ये कहूंगा कि कभी किसी से बहस मत करिए। शायद आपके तर्क खत्म हो जाएं, लेकिन बहस कभी खत्म नहीं होती। हर बहस में एक पक्ष हमेशा हारता है। - स्टीव वोज्नियाक
स्टीव वोज्नियाक