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व्यापारी कोठारी 5 दिन की पुलिस रिमांड पर उसके सलाहकारों से पुलिस करेगी पूछताछ

3 वर्ष पहले
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कृषि उपज मंडी में किसानों से उपज खरीदकर भुगतान किए बिना फरार हुए व्यापारी राजेश कोठारी को पुलिस ने सोमवार दोपहर में न्यायालय में पेश किया। यहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

अब पुलिस यह पता करने में लगी है कि आखिर उसने जो माल बेचकर रकम प्राप्त की उसका क्या किया? प्रारंभिक रूप से पता चला है कि कोठारी ने किसानों से उपज लेकर इंदौर के बड़े व्यापारियों को बेची और जो रकम मिली उससे पुरानी देनदारियां चुकाई। जब घाटा बहुत ज्यादा बढ़ गया और लगा कि किसान उसे नहीं छोड़ेंगे तो वह फरार हो गया। हालांकि पुलिस उसकी इस बात पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रही है। उन्होंने कोठारी का कामकाज देखने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट सहित उसके आर्थिक सलाहकारों से हकीकत जानने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। इसके अलावा पिछले एक साल का हिसाब-किताब भी देखा जा रहा है। ताकि पता चल सके कि कोठारी ने कहां-कहां पैसा लगाया।

गौरतलब है कि कोठारी किसानों से धोखेबाजी करके चार अप्रैल को फरार हो गया था। उसके खिलाफ धार कोतवाली में अलग-अलग 26 एफआईआर दर्ज हुई। कोठारी ने 59 किसानों से कुल 1 करोड़ 17 लाख 56 हजार 865 रुपए की धोखाधड़ी की। 20 मई को उसे राजस्थान के उदयपुर से गिरफ्तार करके लाई है।

आरोपी कोठारी कोर्ट से बाहर आते हुए।

इन बिंदुओं पर पुलिस कर रही है जांच

कोठारी ने पूछताछ में उसके भतीजे का जिक्र किया है। वह उसका सारा कामकाज देखता था। पुलिस उसकी भूमिका का पता कर रही है।

कोठारी के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अनाज ग्रेडिंग मिल में भी पैसा लगाने की जानकारी मिली है।

कोतवाली में किसानों का व्यापारी से आमना-सामना हुआ

धोखाधड़ी का शिकार हुए किसानों को जब पता चला कि पुलिस ने व्यापारी राजेश कोठारी को गिरफ्तार कर लिया है तो 10-12 किसान सुबह-सुबह ही कोतवाली पहुंच गए। यहां उनका व्यापारी से आमना-सामना भी हुआ। इस दौरान किसानों की प्रतिक्रिया मिली-जुली थी। दो-तीन किसान तो कोठारी से बोले कि तू भागता नहीं और तेरी परेशानी हमें बता देता तो हम अपनी रकम के लिए थोड़ा इंतजार कर लेते। वहीं कुछ किसानों में जबर्दस्त गुस्सा था। पुलिस नहीं होती पीट देते।

1 करोड़ 17 लाख रु. की धोखेबाजी

इसलिए किसानों को था कोठारी पर भरोसा

मंडी व्यापारी राजेश कोठारी ने पिछले सीजन में किसानों को डॉलर चने के अच्छे भाव दिलाए थे। ऐसे में उन्हें इस सीजन में भी लग रहा था कि यदि उन्होंने अपना माल कोठारी को दिया तो मुनाफा होगा। इसलिए वे उस पर भरोसा करते चले गए। कोठारी ने भी गुणवत्ता के हिसाब से 6500 से 7500 रुपए तक के भाव दिए। किसानों से माल खरीदा और बदले में उन्हें चेक दे दिए। लेकिन बैंक अधिकारियों से मिलकर उसने भुगतान रुकवा दिया, इससे चेक बाद में बाउंस हो गए।

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