शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय को अब अाधुनिक बनाने की दिशा में तैयारी शुरू हो गई है। कमिश्नर राघवेंद्र सिंह ने मूलभूत काम के साथ अब इसे ई-अस्पताल की तर्ज पर चलाने के प्रोजेक्ट पर काम करने के निर्देश दे दिए हैं। इसके तहत मरीज घर बैठे ही पर्चा बनवा सकेंगे, अपना रजिस्ट्रेशन ले सकेंगे, मेडिकल रिपोर्ट देख सकेंगे और उन्हें छोटे काम और जानकारी के लिए अस्पताल नहीं आना होगा। उप्र में योगी सरकार द्वारा हाल ही में इसे शुरू किया गया है, अब उसी तर्ज पर इसे इंदौर में लागू किए जाने की योजना है।
योजना के तहत मरीज को सुविधा मिलेगी कि वह अस्पताल की वेबसाइट पर लॉग इन कर आधार नंबर या मोबाइल नंबर से भी पंजीकरण कर सकेंगे। इसके अलावा पंजीकरण फीस भी ऑनलाइन ही जमा की जा सकेगी। योजना के तहत मरीज की हेल्थ रिपोर्ट, अस्पताल में चल रहे सभी विकास कार्य, मॉनीटरिंग का काम आदि पर भी टीम ऑनलाइन ही नजर रख सकेगी। इस पर मरीजों का पूरा हेल्थ रिकाॅर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
जिला व अन्य अस्पतालों का विस्तार जरूरी
साथ ही कमिश्नर सिंह ने जिला अस्पताल व अन्य सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं में विस्तार करने को कहा है, जिससे मरीजों को बेवजह एमवाय रैफर न किया जाए। सिंह ने कहा कि एमवाय में विशेष उपचार या उस इलाज के लिए मरीज आना चाहिए, जो कहीं और नहीं मिल पा रहा है। इससे मरीजों की संख्या कम होगी और जरूरतमंद का समय से इलाज हो सकेगा। सिंह ने कहा कि एमवाय में मरीज के लिए मूलभूत सुविधा जैसे बैडशीट, पंखे, एसी पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पीसी सेठी अस्पताल के एसएनसीयू के लिए 22 पद मंजूर, पर नई नियुक्तियां नहीं
इंदौर|पीसी सेठी अस्पताल में बनने वाले सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को लेकर शासन ने स्टाफ की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 18 स्टाफ नर्स और चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। वहीं सफाईकर्मी, वाॅचमैन के पद भी मंजूर किए गए हैं। हालांकि इन पदों पर नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में तैनात स्टाफ को ही प्रतिनियुक्ति पर यहां रखा जाएगा। अस्पताल प्रभारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि मिशन कंसल्टेंट यहां मुआयना भी कर चुके हैं। अभी हमें अस्पताल की नई बिल्डिंग हस्तांतरित नहीं हुई है, जून में पीआईयू ने बिल्डिंग देने का आश्वासन दिया है। संचालनालय से जैसे ही एसएनसीयू के लिए उपकरण और स्टाफ उपलब्ध करा दिया जाएगा, हम सेवाएं शुरू कर देंगे। गौरतलब है कि करीब दस करोड़ की लागत से बनाए जा रहे इस अस्पताल का काम अक्टूबर 2017 में पूरा होना था, लेकिन निर्माण एजेंसी की देरी के कारण प्रोजेक्ट सात महीने पिछड़ चुका है। अब जाकर दस दिन में बिल्डिंग देने की बात कही जा रही है।