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4 साल बाद 40 फीसदी किराया बढ़ाने की मांग को लेकर आज से नहीं चलेंगी बसें

3 वर्ष पहले
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यदि आप 21 मई को बस से सफर करने की सोच रहे हैं तो किसी अन्य साधन से करें। बस किराये में 40 फीसदी बढ़ोतरी की मांग को लेकर मप्र बस आॅनर्स एसो. ने सोमवार से प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इसके समर्थन में जिले की 200 से अधिक बसें नहीं चलेंगी। प्रदेश में संचालित 30 हजार से अधिक बसों के पहिये थम जाएंगे। एसोके पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि बढ़ती महंगाई के बीच दरों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एसो. के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह बुंदेला ने बताया डीजल से लेकर पार्ट्स व उपकरण के दाम में 40 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। बावजूद सरकार द्वारा किराये में वृद्धि नहीं की जा रही है। इसलिए हड़ताल का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रशासन को सूचना दे दी है।

वर्तमान में सरकार द्वारा तय 92 पैसे प्रति किमी किराया लिया जा रहा है। किराया बोर्ड ने 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की अनुशंसा की है। ऐसा होता है तो प्रति किमी 23 पैसा बढ़ जाएंगे। प्रति किमी 1.15 रु. चुकाने होंगे। शासन ने वर्ष 2014 में दो बार दरों का निर्धारण किया था। शुरू में पेट्रोलियम पदार्थ की दरें अधिक रहने की स्थिति में 97 पैसे प्रति किमी दर घोषित की थी। 4 माह बाद डीजल के दाम घटने पर संशोधित आदेश में 92 पैसे प्रति किमी की दर तय हुई थी। जो ली जा रही है।

इन कारणों से 4 साल बाद दरें बढ़ना तय

टायर सेट के दाम 20 हजार रुपए जोड़ा तक हो गए हैं। 4 साल में 5 हजार तक दाम बढ़े। ऑइल, सर्विसिंग, मेंटेनेंस का खर्च 20 फीसदी तक बढ़ गया है। ड्राइवर-क्लीनर के खर्च में 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। पेट्रोलियम पदार्थों की दरों के अलावा टोल दरें भी हर साल 10 प्रतिशत तक बढ़ रही है। परिवहन विभाग संबंधी कामों में परमिट, फिटनेस, रिन्युअल, टैक्स की दरें बढ़ी है।

अनुबंधित बसें चलेगी

अनुबंधित बस ऑनर्स एसो. हड़ताल से अलग है। शहर से 50 अनुबंधित बसें अलग-अलग रूट पर चलती हैं। एसो. अध्यक्ष शिव पटेल ने बताया हमारी मांग 10% किराया बढ़ोत्तरी की है। सरकार से आश्वासन मिला है। हम नहीं चाहते कि यात्रियों को परेशानी हो इसलिए अनुबंधित बसें चलेगी।

मांग मंजूर होती है तो कितना बोझ बढ़ेगा आपकी जेब पर

रूट दूरी दर बोझ वर्तमान संभावित बढ़ेगा

इंदौर 62 60 84 24

कुक्षी 110 90 126 36

बड़वानी 120 110 154 44

राजगढ़ 45 50 70 20

बदनावर 55 50 70 20

झाबुआ 90 80 110 30

रतलाम 90 90 126 36

धामनोद 65 70 100 30

खरगोन 120 110 154 44

ये परेशानी झेलना होगी

किराया देने के बावजूद कई बार बस में सीट नहीं मिलती।

अंचल में ग्रामीणों को छत पर बैठाया जाता है। दुर्घटना होती है तो खामियाजा यात्रियों को ही भुगतना पड़ेगा।

बसें आेवरलोड चलती है। थोड़े से मुनाफे के चक्कर में यात्रियों को भर लिया जाता है।

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