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प्रदेश के 83 लाख परिवारों का होगा मेडिक्लेम

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार आयुष्मान भारत योजना 15 अगस्त से देशभर में लागू कर रही है। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख रुपए का मेडिकल कवर देने की बात कही गई है। जो मानक तय किए गए हैं, उनके आधार पर प्रारंभिक रूप से अनुमान लगाया जा रहा है कि मप्र की करीब सात करोड़ आबादी में से 83 लाख परिवारों को इसके दायरे में लाया जाएगा। सरकारी के साथ-साथ अनुबंधित प्राइवेट अस्पतालों में भी लोगों को कैशलेस इलाज मिलेगा। मेडिक्लेम के लिए सालाना 1200 रुपए की प्रीमियम राशि तय की गई है, जिसे केंद्र और प्रदेश सरकारें मिलकर वहन करेगी। इसमें केंद्र 60 और प्रदेश 40 फीसदी राशि देगा।

योजना के लिए प्रदेश सरकारों ने सर्वे शुरू कर दिया है। गांवों में सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना के तहत डी 1 से डी 7 श्रेणी के परिवारों को शामिल किया गया है। इनमें डी 6 को छोड़ा गया है। मैदानी अमले को इसी सूची के आधार पर सर्वे करना होगा। ग्राम सचिव इसका सत्यापन करेंगे। इसमें मप्र में 15 लाख शहरी आबादी लाभांवित होगी।

सर्वे : 1 परिवार पर खर्च होंगे 10 रुपए

सर्वे के लिए प्रति परिवार चार रुपए का भुगतान होगा। हर परिवार के सत्यापन के लिए तीन और कम्प्यूटर एंट्री के लिए प्रति परिवार तीन रुपए का भुगतान होगा, यानी एक परिवार की एंट्री पर लगभग 10 रुपए खर्च किए जाएंगे। राज्य सरकार का अनुमान है कि 83 लाख परिवारों के सर्वे पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

समस्या : समग्र आईडी जरूरी, पर ज्यादातर के पास है ही नहीं
हितग्राहियों की एंट्री के लिए समग्र आईडी को अनिवार्य किया गया है, जबकि अधिकारियों का मानना है कि ज्यादातर परिवारों के पास यह आईडी ही नहीं है। फिर भी अमले से कहा जा रहा है कि सर्वे कीजिए, जिनके पास समग्र आईडी नहीं होेंगे, उनके बनवाए जाएंगे।

हेल्पलाइन नंबर 25 से जारी होगा

चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर (सीएमएचओ) डॉ. एचएन नायक ने बताया कि सर्वे के लिए 25 अप्रैल से हेल्पलाइन नंबर 1097 भी एक्टिवेट हो जाएगा। जनगणना 2011 के आधार पर सर्वे कराया जा रहा है। इन सात साल में परिवारों में सदस्यों की संख्या कम या ज्यादा हुई होगी। मैदानी अमले को 1800-212-4684 टोल फ्री नंबर दिया गया है। इस नंबर पर कॉल कर हितग्राही के लिए एक एक्टिवेशन कोड दर्ज कराना होगा।

यह है डी-1 से डी-7 श्रेणी
सरकार ने गांवों के लिए डी-1 से डी-7 श्रेणियों को चिह्नित किया है। इनमें कच्चे मकान में रहने वाले वे परिवार जहां 16 से 59 वर्ष का कोई सदस्य नहीं है। ऐसा परिवार जिसकी मुखिया महिला हो, दिव्यांग जिसके यहां कोई सक्षम सदस्य नहीं है, भूमिहीन परिवार, अनुसूचित जाति, जनजाति परिवार।

शहरी आबादी में व्यवसाय आधारित लक्ष्य रखा गया है। इसमें कचरा बीनने वाले, धोबी, चौकीदार, फेरी वाले, ड्राइवर, कंडक्टर, सफाईकर्मी, मजदूर, सुरक्षाकर्मी, कुली, वेल्डिंग करने वाले, रिक्शा चालक, विद्युतकर्मी, मरम्मतकर्ता आदि शामिल हैं। इनमें डी-6 को बाहर रखा गया है। इनमें कौन आते हैं। अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

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