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पट्‌टा नवीनीकरण कराने पर लगेगा 6 गुना भू भाटक

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार ने सरकारी जमीन के स्थायी पट्टों के नवीनीकरण तथा शर्त उल्लंघन के प्रकरणों के निराकरण की नई प्रक्रिया का अनुमोदन किया है। इस संबंध में नए निर्देशों के अनुसार अब पट्‌टा नवीनीकरण कराने पर छह गुना भू भाटक लगेगा।

शासन का मानना है कि पट्टों का नवीनीकरण नहीं हो पाने तथा पट्टों की शर्तों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप भू-भाटक के रूप में शासन को होने वाली निरंतर आय अवरुद्ध हो रही है। जो पट्टेदार अपने पट्टे के भू खंड को विक्रय, दान या अंतरित करना चाहते हैं, वे अंतरण भी नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति के समाधान के लिए राजस्व विभाग ने नई व्यवस्था स्थापित की है। स्थाई पट्टे के नवीनीकरण तथा शर्त उल्लंघन के मामलों में जिला कलेक्टर या उनके द्वारा प्राधिकृत अपर कलेक्टर प्राधिकृत अधिकारी होंगे। पट्टा अवधि समाप्त हो जाने के बाद प्रस्तुत नवीनीकरण के आवेदन पर विलंब के लिए शमन राशि जमा कराना होगी। ऐसे मामलों में पट्टे की शर्तों के उल्लंघन या अपालन का परीक्षण करने के बाद ही प्रकरण नवीनीकरण के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा। स्थल निरीक्षण नजूल अधिकारी या तहसीलदार नजूल के माध्यम से कराया जाएगा। यह अधिकारी पट्टेदार द्वारा जमा भू भाटक, बकाया राशि, उल्लंघन या अपालन की स्थिति, प्रचलित विकास योजना में नियत प्रयोजन के अनुसार उपयोग के संबंध में अपनी रिपोर्ट देंगे। जिसके आधार पर प्राधिकृत अधिकारी आगामी तीस वर्ष के लिये पट्टे का नवीनीकरण कर सकेंगे। नवीनीकरण से पूर्व वार्षिक भू- भाटक का पुनर्निर्धारण हो, जो अंतिम निर्धारित भू भाटक का छह गुना होगा।

निर्देश
राज्य सरकार ने सरकारी जमीन के पट्टा नवीनीकरण की नई प्रक्रिया का अनुमोदन किया
विकास योजना में स्वीकृत तो व्यवसायिक हो सकेगा पट्‌टा

पट्टे की वैधता अवधि में अथवा नवीनीकरण के बाद यदि पट्टेदार पट्टे का उपयोग व्यवसायिक उद्देश्य के लिए परिवर्तित कराना चाहता है और यह उपयोग विकास योजना में स्वीकृत है तो प्राधिकृत अधिकारी प्रीमियम व भू-भाटक निर्धारित करते हुए राशि जमा होने के बाद उपयोग परिवर्तन स्वीकृत कर सकेगा।

क्षेत्रफल से ज्यादा निर्माण पर नपा की अनुमति तो शर्त का उल्लंघन नहीं-पट्टे की शर्त अनुसार भू-खंड में यदि अनुमति से अधिक क्षेत्रफल पर मूल प्रयोजन के लिए निर्माण किया गया है और इस संबंध में स्थानीय नगरीय निकाय की अनुमति प्राप्त की गई है अथवा शमन किया गया है तो पट्टे की शर्त का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

पट्‌टेदार की मृत्यु पर अंतरण अनिवार्य -मूल पट्टेदार की मृत्यु अथवा पट्टेदार द्वारा भू-खंड के विक्रय, दान की स्थिति में पट्टे के अंतरण की कार्रवाई अनिवार्य होगी। अंतरण के बाद छह माह की अवधि के भीतर पट्टे के नवीनीकरण की कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।

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