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मित्रता में धन दौलत आड़े नहीं आती : बालयोगी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | नालछा-जीरापुरा

कर्म ही मनुष्य को महान बनाता है। कर्म से उसकी पहचान बनती है। जैसा कर्म करते हैं वैसा फल मिलता है। भक्ति के बिना ज्ञान और वैराग्य संभव नहीं है। संस्कार युक्त जीवन जीने की कला भागवत कथा से मिलती है। साथ ही यह मोक्ष का साधन भी है। यह बात गांव जीरापुरा के चौसठ याेगिनी माता मंदिर के समीप चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन रविवार को कथावाचक मनोज कुमार बालयोगी ने श्रद्धालुओं से कहीं।

श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बालयोगी ने कहा कि सुदामा के आने की खबर पाकर जिस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। जल भरे नेनो से भगवान ने सुदामाजी के हाल चाल जाने। जिससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में धन दौलत आड़े नहीं आती।

श्रद्धालुओं द्वारा किए जा रहे धार्मिक उद्‌घोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। आगे कहा कथा सुनने से जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं से बुराइयों का त्याग करने का संकल्प दिलाया। शाम को रुक्मिणी विवाह का भी आयोजन हुआ। लोगों ने कन्यादान भी किया। विधायक कालूसिंह ठाकुर, नालछा जनपद अध्यक्ष लालजी डाबर ने पहुंचकर रुक्मिणी व कृष्ण का पूजन कर भागवत कथा की आरती की। समापन पर महाआरती कर प्रसाद बांटी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। आयोजन चौसठ योगिनी सेवा समिति द्वारा किया जा रहा।

नालछा. कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह का प्रसंग हुआ।

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