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3 साल बाद योग्य हो गए पार्षद रामकृपाल कोर्ट ने जन्म प्रमाण-पत्र को ही माना आधार

3 वर्ष पहले
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धौलपुर नगर परिषद के वार्ड 44 के पार्षद रामकृपाल आखिर तीन साल बाद फिर से योग्य हो गए। राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके जन्म प्रमाण-पत्र को ही आयु गणना का सही दस्तावेज मानते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया है।

इससे पहले जिला न्यायालय ने 20 फरवरी, 2015 के अपने फैसले में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की अंकतालिका को आधार मानते हुए रामकृपाल को अयोग्य घोषित कर दिया था। उसने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रामकृपाल के वकील सुमित विश्नोई के मुताबिक उनकी ओर से दायर अपील में कहा गया था कि उम्र की गणना 10वीं बोर्ड की अंकतालिका के आधार पर नहीं बल्कि जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर की जानी चाहिए। क्योंकि, जन्म प्रमाण पत्र पैदाइश के 15 दिन बाद ही माता-पिता और अस्पताल की सूचना के आधार पर तैयार किया जाता है। जबकि 10वीं बोर्ड की अंकतालिका स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर तैयार होती है। कई बार स्कूल में जन्मतिथि अंदाज से भी अंकित कर दी जाती है। इसलिए जन्म प्रमाण-पत्र को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाण-पत्र को ही मान्यता देते हुए जिला न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया। इससे पहले जिला न्यायालय ने रामकृपाल का चुनाव निरस्त करते हुए वार्ड-44 में पार्षद का रिक्त घोषित करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग और स्वायत्त शासन विभाग को फैसले की कॉपी भेजने के आदेश कर दिए थे।

धौलपुर नगर परिषद के 20 अगस्त, 2015 को घोषित हुए चुनाव नतीजों के मुताबिक रामकृपाल वार्ड-44 से विजयी हुए थे। जबकि भाजपा के टिकट पर लड़े उसके ताऊ के बेटे धर्मेंद्र जाट तीसरे स्थान पर रहे थे। इसी वजह से उसने रामकृपाल के खिलाफ चुनाव याचिका लगाकर जिला एवं सत्र न्यायालय से उसे अयोग्य घोषित कराया था। इसमें कहा गया था कि नामांकन भरने के समय रामकृपाल निर्धारित 21 साल की आयु सीमा पूरी नहीं करते थे।

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