पुलिस के लिए सिर दर्द बने वाहन चोर
2 वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष चार महीने में अधिक चोरी हुए वाहन
110 वाहन चोरी हुए थे साल 2017 में
इस साल 45 वाहन ही किए बरामद।
वाहन चोरी के बाद पुलिस की लापरवाही
वाहन चोरी होने की सूचना के बाद पुलिस काफी लापरवाही बरतती है। कंट्रोल रूम से नाकाबंदी की सूचना मिलने के बाद भी नाकाबंदी नहीं की जाती है। पीड़ित रिपोर्ट लिखवाने के लिए थाने पहुंचता है तो आसानी से उसकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की जाती है।
चोरी की बाइक मिलने के बाद काटने पड़ते हैं चक्कर : पीड़ित बाइक चोरी होने के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा देता है। इस दौरान अगर उसकी बाइक कहीं पर मिल जाती है तो बाइक को लेने के लिए उसे चक्कर काटने पड़ते हैं। पीड़ित को कोर्ट में जाकर बाइक के दस्तावेज जमा करवा कर सुपुर्दगी करवानी पड़ती है, तब जाकर उसे थाने से बाइक मिल पाती है।
धौलपुर. शहर में वर्ष 2016-17 की अपेक्षा इस वर्ष के चार महीने में अधिक वाहन चोरी हुए हैं। जनवरी-18 से अप्रैल-18 तक करीब 80 वाहन चोरी हुएहैं। पुलिस ने 20 वाहनों को बरामद भी कर लिया है। 2016 और 2017 में जनवरी से अप्रैल तक वाहन चोरी की 40 से 45 घटनाएं हुई थी। 10 से 15 वाहन बरामद हुए।
वर्ष 2016 2017 2018
वाहन चोरी/बरामद चोरी/बरामद चोरी/बरामद
दुपहिया 105/35 110/45 80/20
चौपहिया
पांच से छह हजार में बेच देते बाइक
जिले में बाहर के कई वाहन चोर गैंग सर्किय हैं। बाइक चोर शहर से बाहर कबाड़ियों से संपर्क रखते हैं। इसके बाद बाइकों को खोल कर अलग-अलग पाट्र्स कर बेच देते हैं। इसके अलावा बाइकों को दूरदराज से पढ़ने आने वाले छात्रों को भी पांच से छह हजार रुपए में बेच देते हैं।