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वाराणसी हादसे से लिया सबक: जिला प्रशासन की पहल पर इंजीनियरों ने किया निरीक्षण

3 वर्ष पहले
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धौलपुर. गुलाबबाग चौराहे के पास हाईवे के फ्लाईओवर ब्रिज पर दरारें। इस ब्रिज के नीचे दिन भर लोगों का आवागमन रहता है।

गुलाब बाग फ्लाई ओवर में बढ़ रहीं हैं दरारें, हादसे की आशंका

भास्कर संवाददाता | धौलपुर

नेशनल हाईवे-3 पर गुलाब बाग के ऊपर बने फ्लाई ओवरब्रिज में कई जगहों पर दरारें आ गई हैं। ओवरब्रिज पर रोजाना हजारों की संख्या में गुजरने वाले हैवी वाहनों की धमक से अब दरारें बढ़ती भी जा रही हैं। जिन्हें नीचे से देखने में लोगों को डर सा लगने लगा है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। क्योंकि फ्लाई ओवरब्रिज के ऊपर वाहनों के आवागमन के साथ नीचे भी हजारों की संख्या में शहर के लोगों का आवागमन रहता है। साथ ही ओवरब्रिज के नीचे बने फुटपाथ और आसपास दर्जनों की संख्या में लोग भी खड़े रहते हैं। हालांकि इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी जानकारी है। वाराणसी में हुए हादसे से सबक लेते हुए अधिकारियों ने एनएचआई के इंजीनियरों को बुलाकर ओवरब्रिज की दरारों की जांच भी करवाई हैं, लेकिन इंजीनियरों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को इन दरारों को ज्वाइंट के बीच में छोड़े जाने वाले गैप्स बताए हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने एनएचआई के इंजीनियरों को एक बार फिर सीनियर अधिकारियों की जानकारी में मामला डालकर सीनियर इंजीनियरों से निरीक्षण करवाने के आदेश दिए हैं।

आप यह जानिए...

5 साल पहले 6 माह में दो बार धंसी सड़क, तब रोका था हैवी ट्रैफिक

करीब दो सौ करोड़ की लागत से बनाए गए ओवर ब्रिज की सड़क पांच वर्ष पूर्व जनवरी-2016 में 6 माह में दूसरी बार गुलाब बाग चौराहे के पास धंस गई थी। सड़क धंसने की जानकारी मिलने पर यातायात पुलिस ने ओवर ब्रिज पर हैवी ट्रैफिक रोक दिया था। तत्कालीन यातायात प्रभारी अनिल जसौरिया ने गुलाब बाग चौराहे पर सरीन पेट्रोल पम्प के सामने ओवरब्रिज से सीमेंट व गिट्टी गिरती हुई देखी। इसके बाद ओवर ब्रिज के ऊपर जाकर सड़क देखी तो सड़क का करीब पांच फुट ऊपरी हिस्सा धंसा हुआ था और ब्रिज के निचले हिस्से से सीमेंट व गिट्टी गिर रही थी। यातायात प्रभारी ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए ओवरब्रिज से गुजरने वाले भारी वाहनों को रोक दिया था। लेकिन फिर भी ओवरब्रिज से हर समय खतरे का अंदेशा बना रहता है।

3 फ्लाईओवर बने नेशनल हाईवे पर

200 करोड़ रुपए की आई लागत

10 साल में बनकर हुआ तैयार

200 करोड़ का प्रोजेक्ट, शहर में 3 फ्लाईओवर बनने में लगे 10 साल

धौलपुर शहर से गुजरने वाले एनएच-3 में तीन फ्लाईओवर करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बने हैं। जिन्हें बनने में करीब 10 साल का समय लग गया। आगरा की ओर से आने पर पहला फ्लाईओवर मिडवे के सामने से शुरू होता है जो बस स्टैंड के पास खत्म होता है। वहीं दूसरा कलेक्टर कोठी से शुरू होकर वाटरवर्क्स पर खत्म होता है और तीसरा सागरपाड़ा से पहले शुरू होता है। एडवोकेट अतुल भार्गव ने बताया कि करीब तीन साल तक पेड़ कटने की मंजूरी नहीं मिली थी। ऐसे में फ्लाईओवर ब्रिज का काम अटका रहा था।

पहले सिंगल फ्लाईओवर बनना तय हुआ, बजट अधिक आने पर तीन टुकड़ों में बना

घंटाघर रोड स्थित डॉ.विजय सिंह ने बताया कि हाईवे पर बनने वाला फ्लाईओवर ब्रिज पहले सिंगल प्रोजेक्ट पर तैयार होना था। इसमें एक ही पुल बनाया जाता, लेकिन सिंगल प्रोजेक्ट पर बजट अधिक होने के कारण करीब तीन टुकड़ों में तीन फ्लाईओवर बनाए गए। डॉ.विजय सिंह ने बताया कि शहर के गुजरने वाले फ्लाईओवर में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। ऐसे में शहर दो भागों में बंट गया। बहरहाल लोगों को तो परेशानी हो ही रही है।

धौलपुर. हाईवे के फ्लाईओवर ब्रिज पर दरारें जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकती हैं।

15 मई को वाराणसी में फ्लाईओवर ब्रिज के दो बीम गिरे थे, 15 लोगों को हुई मौत

वाराणसी के कैंट इलाके में 15 मई को निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज के दो बीम गिर गए थे। इसमें दब कर 15 लोगों की मौत हो गई थी। एक रोडवेज बस, एक बोलेरो, दो कार, एक आटो रिक्शा और 10 दोपहिया वाहन भी बीम की चपेट में आ गए थे। घटना के बाद अब इन फ्लाइओवरों को लेकर भी लोगों के मन में संशय बना हुआ है कि कहीं इनका भी अस्तित्व वाराणसी जैसा न हो जाए। विभागीय अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

आरपीएससी चेयरमैन ने भी देखे हालात

आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन डॉ. राधेश्याम गर्ग ने बताया कि शहर में बने फ्लाईओवर ब्रिज में भी दरारें बढ़ रही हैं। जिसे उन्होंने ने भी देखा है। ऐसे में इस पर निगरानी रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ओवरब्रिज की घटनाएं काफी सुनने को मिल रही हैं। वाराणसी में भी ओवरब्रिज गिरा। इससे दर्दनाक घटना हुई है। उन्होंने कहा कि ओवरब्रिज की लगातार निगरानी से बड़े हादसे से बचा जा सकता है।

शहर से गुजरने वाले हाईवे ओवर ब्रिज में कई जगहों पर दराहें हैं तो हमने एनएचएआई के इंजीनियरों को बुलाकर जांच करवाई है। उन्होंने इसे पिलरों के जोड़ का गैप्स बताया है। फिर भी उन्हें सीनियर इंजीनियरों को एक बार फिर से दिखवाने को कहा है। -हरफूल सिंह यादव, एडीएम, धौलपुर

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