धौलपुर | न तो मेरी अभी 18 साल की नौकरी पूरी हुई है और न ही उम्र 50 वर्ष, इसके बावजूद भी मुझे अनिवार्य सेवानिवृत्ती दे दी गई। यह कहना था नीचम से दिल्ली राष्ट्रपति से अपनी इसी पीड़ा को बताने जा रहे नीमच के अपर एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार श्रीवास का। नीमच से बाइक पर निकले न्यायाधीश श्रीवास ने धौलपुर पहुंचने पर बताया कि उन्होंने बताया कि नौकरी के दौरान मुझे परेशान करने के लिए कई बार तबादले भी किए गए, लेकिन मैने हार नहीं मानी और हर तरह की परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में 1700 जजों में से केवल उन्हें ही अनिवार्य सेवानिवृत्ती दी गई है, जबकि उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन भी नहीं किया था। उन्होंने बताया कि इस तरह जबरदस्ती सेवानिवृत्ती से उनके परिवारवालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और उन्हें अपनी इस पीड़ा से अवगत कराएंगे। धौलपुर पहुंचने पर समाजजनों ने स्वागत भी किया।