अखिल भारतीय मीरा साहित्य संगम के तत्वाधान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन स्थानीय वनस्थली उच्च माध्यमिक विद्यालय, गौशाला, धौलपुर में आयोजित किया गया। जिसमें दूर -दराज क्षेत्रों से आए हुए कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से राष्ट्र जागरण किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज सेवी सतीश शर्मा मैनेजर एवं विशिष्ट अतिथि ब्राह्मण अंतर्राष्ट्रीय युवा संगठन के जिलाध्यक्ष ऋषिकेश भारद्वाज एवं महासचिव महेंद्र दुबे थे। सर्वप्रथम अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया।
इसके बाद अतिथियों का स्वागत मीरा साहित्य संगम के संस्थापक एवं अध्यक्ष वरिष्ठ कवि विकल फर्रुखाबादी द्वारा किया गया। मथुरा से पधारीं कवयित्री सुधा अरोड़ा के द्वारा मां शारदे की वंदना की गई। दिल्ली से पधारे ओज के युवा कवि विवेक कुमार विवेक ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से श्रोताओं के मन में रक्त संचार किया, उसके बाद सैंपऊ के युवा कवि योगेंद्र रघुवंशी ने शिव स्तुति हे शिव शम्भू हे कैलाशी सुनाकर श्रोताओं को भक्तिमय कर दिया। बाड़ी से आए श्रृंगार के वरिष्ठ कवि राकेश दीक्षित ने नीर भरी बदरी बनके तुम हिय आंगन पर छा जाना, मेरे मन की तप्त धरा पर प्रेम सुधा बरसा जाना सुनाकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ श्रोताओं को श्रृंगार रस में डुबो दिया। उसके बाद ओजस्वी कवि राजवीर सिंह ने ‘हनुमान निज रूप भूल नहीं जाएं, कहीं जामवंत बनके क्रांति काम करता हूं मैं’ सुनाकर श्रोताओं की भरपूर तालियां बटोरीं। कवयित्री सुधा अरोड़ा ने राधा कृष्ण के प्रेम युक्त गीत सुनाकर श्रोताओं को सराबोर कर दिया। उसके बाद हास्य के बम के नाम से जाने वाले लटूरी लट्ठ ने अपने अद्भुत संचालन एवं काव्य पाठ से श्रोताओं को हंसा हंसाकर लोटपोट कर दिया। देश के बड़े गीतकार यशपाल ष्यशष् ने राखी के धागे साथ लड़े, संग संग बापू का प्यार लड़ा। मैं नहीं अकेला सरहद पर मेरे संग हिंदुस्तान लड़ा एवं चूड़ियों की रचना सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। गजलकार विपिन चैहान “मन” ने अपनी गजलों से शमां बांध दिया। वरिष्ठ कवि विकल फर्रुखाबादी ने चाहता हूं मैं कि मुझे और सताया जाए, क्या है अपराध मेरा, ये न बताया जाए, सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कानपुर से पधारे वरिष्ठ कवि डॉ.जगदीश नारायण त्रिपाठी “सुमन” ने तुलसी महाकाव्य के अद्भुत छंद सुनाकर एवं जिसने मरना सीख लिया है, जीने का अधिकार उसे ही है। गीत सुनाकर श्रोताओं को चिंतन करने पर विवश कर दिया।
मुरारी लाल मंजुल एवं बाबूलाल सागर ने भी काव्य पाठ किया। सुबह चार बजे तक चले कवि सम्मेलन में सैकड़ों श्रोताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा काव्य का रसास्वादन किया। अंत में वनस्थली के प्राचार्य एवं संचालक अतरसिंह तोमर ने पधारे हुए समस्त कवियों का आभार प्रकट किया। अखिल भारतीय मीरा साहित्य संगम के संस्थापक अध्यक्ष विकल फर्रुखाबादी द्वारा समस्त कवियों एवं अतिथियों को स्मृतिचिन्ह भेंट किए गए।