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अराजकता और दंगा फैलाने का प्रयास करने वाले 3 आरोपियों की जमानत खारिज

3 वर्ष पहले
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धौलपुर । जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रप्रकाश श्रीमाली ने 2 अप्रैल को अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा द्वारा आयोजित बंद के दौरान अराजकता और दंगा फैलाने का प्रयास करने के आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है। लोक अभियोजक भगवान सिंह नारोलिया ने बताया कि 2 अप्रैल को अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा द्वारा जिला मुख्यालय पर रैली निकालकर नारेबाजी की गई और कलेक्ट्रेट परिसर में लगे सरकारी बोर्डों को तोड़ा गया। इसके अलावा सरकारी एंबुलेंस को भी क्षतिग्रस्त किया गया था। इस पर न्यायालय ने सुरेश पुत्र नत्थीलाल निवासी दरियापुर, भगवती प्रसाद पुत्र रामजीलाल निवासी दरियापुर व जोगेंद्र पुत्र राजेंद्र निवासी सागरपाड़ा का जमानत प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया है। साथ ही न्यायालय ने भी टिप्पणी की है कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए न्यायिक आदेश के खिलाफ में आरोपियों द्वारा जाति विशेष के लोगों को इकट्ठा कर अराजकता उत्पन्न करने का प्रयास किया। आमजन व पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट की। सरकारी संपत्ति को तोड़-फोड़ कर आग लगाकर नुकसान पहुंचाने का कार्य किया गया तथा दंगा भड़काने का कार्य किया गया। सरकारी होर्डिंग को तोड़-फोड़ कर जलाया गया तथा पुलिस कर्मियों व आम जनता पर पथराव किया और सरकारी एंबुलेंस 108 को छोड़कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। आरोपियों के खिलाफ अपराध अत्यंत गंभीर किस्म के हैं। आरोपियों ने अराजकता और दंगा फैलाने का प्रयास कर सरकारी संपत्ति की तोड़फोड़ कर आग लगाई। उनके इस कृत्य से जनता को अत्यंत परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए प्रकरण के गुण दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाना न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरोध में आरोपियों को रैली निकालने का अधिकार नहीं था और उन्होंने अराजकता पैदा की है। विद्वानों के विरुद्ध आरोपित अपराध अत्यंत गंभीर किस्म के हैं। इसलिए जमानत प्रार्थना-पत्र अस्वीकार कर खारिज किया जाता है।

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