समाजसेवी विजय केसरी ने धुरकी प्रखंड मुख्यालय के समक्ष समस्या तथा उसके समाधान के लिए एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तारपूर्वक चर्चा भी किया गया। सर्वप्रथम विजय केसरी ने अपने पिता जेवीएम नेता सह पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी के साथ नारेबाजी करते हुए गर्मजोशी के साथ अपने समर्थकों के साथ जननायक कर्पूरी ठाकुर के मूर्ति पर मल्यार्पण किया। उसके बाद धुरकी प्रखंड के विभिन्न गांवों के दिवंगत समाजसेवियों की तस्वीर पर मल्यार्पण कर उनको श्रद्धांजलि दी गई।
इस कार्यक्रम में विभिन्न तरह के दस काउंटर भी बनाए गए थे जिसमें विकलांग, विधवा, बेरोजगार, मजदूर सहित कई तरह के काउंटर का उद्घाटन पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी तथा डा. असजद अंसारी ने सामूहिक रूप से फीता काटकर किया। उसके बाद मंच पर इस क्षेत्र के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति शनिचर भुइयां के द्वारा उन्हें सम्मानित करने के बाद उन्हीं से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डा. असजद अंसारी ने विचार गोष्ठी के माध्यम से कहा की आज इस क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ी है, लोग पलायन कर रहे हैं, तथा किसानों के लिए भी संपूर्ण रूप से सिंचाई की व्यवस्था नहीं होना अत्यंत ही दुखद है। इन्हीं समस्याओं को निदान करने के लिए हमारे बड़े भाई विजय केसरी ने जन सेवा करने के लिए ही आज विचार गोष्ठी का आयोजन कर रहे हैं जिससे उन्हें क्षेत्र के लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का हल करने के लिए सदा तत्पर हैं।
पूर्व मंत्री रामचंद केसरी ने कहा की विजय केसरी राजनीतिक क्षेत्र में उनके उत्तराधिकारी के रूप मे उनकी जिम्मेदारी निभाएंगे जिसमें इस क्षेत्र के दबे, कुचले, गरीब असहाय लोगों की मदद कर उनकी सेवा करना ही लक्ष्य है। उन्होंने कहा की आगामी चुनाव में विजय केसरी ही उनके उत्तराधिकारी के रूप में विधायक का चुनाव लड़ेंगे और निस्वार्थ इस क्षेत्र के लोगों का सेवा करेंगे। इस क्षेत्र की जनता के आशीर्वाद के चलते ही वे दो बार इस क्षेत्र का विधायक बनकर सेवा की है, लेकिन अब वही आशीर्वाद उनके पुत्र विजय केसरी को भी चाहिए। इस दौरान कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र पाठक ने किया और अध्यक्षता विजय केसरी ने किया। इस अवसर पर नईम खलीफा, कृष्णा जी, प्रमुख विनोद कोरवा, रामाशंकर जायसवाल, श्याम किशोर विश्वकर्मा, घनश्याम प्रसाद, दामोदर जायसवाल, रामदेनी गुप्ता, उदय साव, अशोक गोड़ आदि उपस्थित थे।