करीब 45 सालों से गांव की हर गतिविधि एवं घटनाओं का लेखा जोखा रखने वाले ताराखेड़ी के इतिहासकार पटेल बद्रीलाल कुमावत (70) का शुक्रवार शाम निधन हो गया। शनिवार सुबह अंतिम यात्रा निकलेगी। वे कुमावत समाज से हैं लेकिन पंडित की तरह गांव का लेखा जोखा रखने की वजह से ग्रामीण उन्हें शर्मा जी कहकर पुकारते थे।
सामान्य बोलचाल में बद्रीलाल शर्मा के नाम से पहचाने जाते थे। उनके इकलौते पुत्र ओमप्रकाश कहते हैं कि पिता आठवीं तक पढ़े हैं और 25 साल की उम्र से गांव का लेखा जोखा रखने के शौकीन थे। गांव में जब कोई बड़ा आयोजन होता, किसी के घर बच्चे का जन्म या कोई मृत्यु होती अथवा विवाह समेत अन्य बड़े यादगार कार्यक्रम होते तो उसकी तारीख और विवरण डायरी में लिखते जरूर थे। इसके लिए उन्होंने कई डायरियां लिखी हैं। वे इस रिकॉर्ड को अमूल्य संपत्ति मानते थे और इसे हमेशा व्यवस्थित व सुरक्षित रखते थे। सरपंच डॉ. सुरेश राठौड़ व लोकेंद्रसिंह पंवार कहते हैं ग्रामीणों को यदि इमरजेंसी में किसी के जन्म, मृत्यु, विवाह या बड़े आयोजन की तारीख या विवरण की जरूरत होती तो वे पटेल बद्रीलाल कुमावत उर्फ शर्मा के पास ही जाते थे। निधन से क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।