अस्पताल में कम पड़ने लगा बिस्तर अब प्रतीक्षालय को बना दिया वार्ड
ब्लाॅक मुख्यालय में 30 बिस्तर सामुदायिक अस्पताल तो है लेकिन भवन सहित बेड के कमी के चलते मरीजों को परेेशानी हो रही है। अस्पताल में हर रोज 50 से 60 मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन पर्याप्त जगह नहीं हाेने के कारण दिक्कत हो रही है। गौरतलब है कि शिविर या मौसमी बीमारियों में मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक बिस्तर पर दो मरीजों को भी लेटाना पड़ता है या नहीं तो जमीन पर ही मरीजों का इलाज करना पड़ता है। जिस तरह से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उस हिसाब से 30 बिस्तर को बढ़ाकर 50 बिस्तर कर दिया जाना चाहिए।
अस्पताल में डाॅक्टरों सहित स्टाफ की कमी है। बारिश या अन्य वायरल सीजन, कैंप के समय भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है। ऐसे समय एक बिस्तर पर दो मरीजों को लेटाना पड़ता है। यहां का सेटअप 30 बिस्तर वाले होने के कारण स्टाॅफ की कमी है। मौजूदा स्थिति में कम से कम 50 बिस्तर का अस्पताल होना चाहिए।
गुुंडरदेही. अस्पताल में जगह कम होने के कारण सटाकर लगा दिया बेड।
सोनोग्राफी मशीन नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन से कई रोगों का पता लगाने में मदद मिलती है। लेकिन अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से मरीजों को धमतरी या दुर्ग जाना पड़ता है। इसके चलते उन्हे अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल में ही सोनोग्राफी उपलब्ध कराई जाए तो लोगाें को सुविधा मिलेगी।
अस्पताल में भवन की कमी के चलते पूर्व में मरीजो के अटेंडेंट के लिए बनाए गए प्रतीक्षालय को वार्ड का रूप दे दिया गया है। जगह कम हाेने के कारण बिस्तर भी सटाकर लगाया गया है। जिसके कारण परिजन को परेशानी हाे रही है।
सटाकर लगाया गया बिस्तर
ब्लड स्टोर की सुिवधा नहीं
अस्पताल में हाल ही में ब्लड स्टोरेज की सुविधा दी गई है। किन्तु कुछ महीने बाद फ्रीजर खराब हो गया। इसके बाद डौंडी एक फ्रीजर लाया गया था। वह भी पुराना होने के कारण खराब हो गया। ऐसी स्थिति में दोनाें फ्रीजर के पार्ट्स को जोड़कर काम चला रहा था। बाद में वह भी बंद हो गया। तीन माह से ब्लड स्टोरेज का फ्रीजर बंद होने से मरीज परेशान हैं।
ओपीडी में जगह की कमी
प्रभारी बीएमओ डाॅ केपी चंद्राकर ने बताया कि अस्पताल में पूर्व बीएमओ के समय से ही एंबुलेंस की मांग की जा रही है। सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र की ओपीडी में जगह की कमी है। इसके लिए भवन काे दो मंजिला बनाया जा सकता है। डाॅक्टरों के लेटलतेफी पर उन्होंने कहा कि अस्पताल में कुल चार डाॅक्टर हैं। मेरे फील्ड में रहने के कारण तीन डाॅक्टर ही अस्पताल में सेवा दे पाते हैं।
अस्पताल में एंबुलेंस नहीं
अस्पताल की एकमात्र एंबुलेंस भी चलने लायक नहीं हैै। कंडम स्थिति में तीन साल से एक ही जगह खड़ी है। मरीजों को रेफर करने की स्थिति में एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाती। मजबूरी में लोगों को निजी वाहन का सहारा लोना पड़ता है। कभी-कभी तो संजीवनी 108 काे भेजा जाता है। इससे मरीजों को अस्पताल तक लाने में देरी तक हो जाती है।