महंगी किताबों के खिलाफ ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं
शहर के प्राइवेट स्कूलों में निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस से हटवाने के लिए शनिवार को नागरिक कल्याण संघ के बैनर तले सामाजिक संगठनों और अभिभावकों की मीटिंग हुई। सेक्टर-6 के वरिष्ठ नागरिक क्लब में हुई इस बैठक में लोगों ने प्रशासन से एनसीईआरटी व एससीईआरटी की पुस्तकें लगवाने की मांग की गई। बैठक की अध्यक्षता करते रणबीर राठी ने कहा कि 12 मार्च और 9 अप्रैल को अधिकारियों को शिकायती ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। प्रशासन की इस अनदेखी के कारण अभिभावकों को महंगे रेट पर ही किताबें खरीदनी पड़ी। इससे साफ है कि ज्ञापन देने और शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। अब 16 अप्रैल को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अभिभावक उनके पूछेंगे कि पिछले ज्ञापनों पर क्या कार्रवाई की गई?
महंगी किताबों के खिलाफ सामाजिक संगठन और अभिभावक हुए एकजुट, 16 को प्रदर्शन
किसी ने यह भी नहीं पूछा पुस्तकें
कितने रुपए में मिल रही
रणबीर राठी ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों, निजी पब्लिशर्स और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मंशा पर अब सवालिया निशान लग रहा है। प्रशासन के अधिकारी इस मामले को लेकर शुरू से ही बैकफुट पर हैं। लिखित रूप से एसडीएम और अन्य अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद भी प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि किसी ने उनसे यह भी नहीं पूछा कि उनके यहां कौन सी क्लास की पुस्तकें कितने रुपए में मिल रही है। इस मौके पर जयपाल सांगवान, श्रीओम अहलावत, विरेंद्र आर्य, रविंद्र दलाल, सुरेंद्र फौजी, अनिल दलाल, कृष्ण अहलावत, राजकुमार जून, सतबीर राठी, रघुवीर राठी, रामवतार, तेजा पहलवान, मुकेश पांचाल, रामकुमार दलाल, नरेंद्र जांगड़ा, रघुवीर सिंह, कैप्टन मान सिंह, सूरत सिंह, रामसिंह जून, नीरज बंसल, रावी मोधा, चांद सिंह आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
अभिभावक अपने बच्चों को राजकीय विद्यालय में पढ़ाएं: बादली। सरकारी स्कूल में कस्बे के ग्रामीणों से ज्यादा से ज्यादा बच्चों को दाखिले दिलाने के लिए कस्बा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों ने कस्बे का दौरा किया। इस दौरान अध्यापकों ने अभिभावकों को सरकारी योजनाओं के साथ-साथ अपने स्कूल की विशेषताओं और अच्छी पढ़ाई व वातावरण से भी अवगत कराया। दौरे में स्कूल प्राचार्य हरिशचंद्र डागर और अन्य अध्यापक-अध्यापिकाओं ने कहा कि अभिभावक प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा के मोह से निकलकर सरकारी स्कूलों की तरफ रुख करें। अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाएं। अभियान में स्कूल स्टाफ ने अभिभावकों से मिलकर उनसे गांव के सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला कराने, अच्छी शिक्षा के साथ साथ सरकारी योजनाओं का भी लाभ उठाने का आह्वान किया। स्कूल प्राचार्य डागर ने अभियान के बारे में जानकारी देते बताया कि सरकार की शिक्षा के प्रति सुधारात्मक नीति व विगत वर्ष स्टॉफ की ओर से किए गए शिक्षा सुधार के प्रयासों से अभिभावकों को अवगत कराया। कस्बे के अभिभावकों को समझाया की अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं। हमारे पास अति योग्य स्टाफ है।