ग्रामीणों की सजगता से साल का जंगल संरक्षित, माफियाओं की नहीं गलती दाल
डुमरिया मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर साल के घने जंगलों के बीच बसा लखाईडीह गांव अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत है। यहां के ग्रामीणों ने आसपास के जंगलों को संरक्षित करके रखा है। जिसमें हजारों की संख्या में साल के पेड़ लहलहा रहे हैं। तपिस में भी यहां गर्मी का एहसास नहीं होता है। यहां साल के पेड़ को काटना प्रतिबंधित है। पेड़ काटने पर गांव में बैठक कर आर्थिक दंड लगाया जाता है। सड़क के किनारे घने जंगल तक सिर्फ साल ही साल दिखाई देते हैं। पूरे प्रखंड में सबसे अधिक साल वृक्ष लखाईडीह के घने जंगलों में हैं। वन विभाग ग्रामीणों को प्रोत्साहित करते रहता है, तथा विभिन्न मद से आर्थिक सहयोग भी करता है। ग्राम प्रधान कान्हूराम टुडू की पहल पर ही ग्रामीण वन रक्षा के प्रति इतने सजग हैं। उन्होंने कहा कि हमारे गांव मे दारू बनाना, बेचना व पीने पर प्रतिबंध है। गांव के लोगों में एकजुटता है। वहीं लकड़ी माफिया इन साल पेड़ों की ओर ललचाई नजरों से देखते हैं। ग्रामीणों की सक्रियता से उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाते। ग्रामीणों का कहना है कि सतर्कता बरतते हुए जंगल की रक्षा करना है, क्योंकि यह हमारे पूर्वजों की धरोहर है।