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घाटशिला के बुरूडीह की तर्ज पर भागाबांदी में बनेगा चेकडैम, आसपास के 5 हजार किसानों को होगा लाभ

3 वर्ष पहले
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घाटशिला के बुरूडीह डैम की तर्ज पर डुमरिया प्रखंड के भागाबांदी (काशीबेड़ा ) में एक चेकडैम का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए नई दिल्ली से आकर केंद्रीय जल आयोग की टीम ने स्थल का भौतिक निरीक्षण किया। यहां भागाबांदी नाला पर डैम बनाने की स्वीकृति मिल गई है। जानकारी हो कि तत्कालीन सांसद आभा महतो ने उक्त स्थल पर वृहद डैम बनाने की अनुशंसा सरकार से की थी। उक्त अनुशंसा के आलोक में देर से ही सही केंद्रीय जल आयोग ने खोज खबर ली। उसके बाद अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में उक्त स्थल का भौतिक सत्यापन के लिए टीम को भेजा। टीम ने स्थल निरीक्षण के उपरांत इसकी स्वीकृति दे दी है। खडिदा पंचायत के अंतर्गत भागा-बांदी में डैम बनने से इस इलाके के करीब 5 हजार किसानों को सीधा लाभ होगा। जामबनी, बेसरपहाड़ी, पाथरासाई, खडिदा, खतपाल, धोलाबेड़ा आदि गांव के लोगों को सालभर पानी मिल सकेगा। यहां के किसानों का कहना है कि अगर सिंचाई का साधन उपलब्ध करा दिया जाए तो किसानों को रोजगार के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। यहां के किसान धान की खेती करते हैं। पानी के अभाव में धान की फसल भी सूख जाती है। इसके अलावा अधिकांश किसान अपने स्तर से पानी की व्यवस्था करके सब्जी की खेती भी करते हैं। फिलहाल मानसून पर यहां के किसान निर्भर हैं। दूसरी ओर भूमि का जलस्तर भी बना रहेगा।

जामबनी, बेसरपहाड़ी, पाथरासाई, खडिदा, धोलाबेड़ा गांवों को मिलेगा सालभर पानी

क्या है सीडब्ल्यूसी

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) देश के भीतर जल संसाधन के क्षेत्र में एक मुख्य तकनीकी संगठन है। यह बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा जल विद्युत विकास के लिए संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से पूरे देश में जल संसाधनों के नियंत्रण, संरक्षण और उनके उपयोग के लिए योजनाएं शुरू करने, समन्वय करने तथा उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सामान्य रूप से जिम्मेदार है।

योजना धरातल पर उतरी तो किसानों का होगा कायाकल्प

केंद्रीय जल आयोग की टीम द्वारा निरीक्षण करने से ग्रामीणों में खुशी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना धरातल पर उतरी तो किसानों का कायाकल्प हो सकता है। टीम ने बताया कि घाटशिला के बुरूडीह की तर्ज पर यहां डैम का निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर के माध्यम से काम शुरू कराया जाएगा। बुरूडीह डैम से आसपास के किसान जिस तरह खेती के लिए पानी की जरूरत पूरी करते हैं। उसी तरह यहां के किसानों को भी पानी मिल सकेगा। डुमरिया प्रखंड में हर साल एक दर्जन से ज्यादा चेकडैम का निर्माण कराया जाता है। निर्माण में ईमानदारी नहीं बरते जाने के कारण इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि यहां चेकडैम योजना पूरी तरह फेल है। अधिकांश चेकडैम योजना विवादों में फंसकर रह गई है।

डुमरिया : केन्द्रीय जल आयोग की टीम भागाबांदी में चेकडैम निर्माण के लिए स्थल का निरीक्षण करती ।

प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास की होगी व्यवस्था

टीम के अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए मास्टर योजना तैयार की जाएगी। पहले फेज में इसका सर्वेक्षण तथा योजनाओं की डिजाइन व जल संसाधन परियोजनाओं का तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन किया जाएगा। इस योजना से परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास तथा पुनर्स्थापना सहित पर्यावरणीय पक्ष को भी देखा जाएगा। जल संसाधन क्षेत्र में सुदूर संवेदी तकनीकों का अनुप्रयोग किया जाएगा। त्वरित कार्यान्वयन और समय पर कार्य की समाप्ति सुनिश्चित करने के लिए परियोजना की मॉनिटरिंग भी होगी।

केंद्रीय जल आयोग की टीम डुमरिया प्रखंड के भागाबांदी के निकट डैम बनाने को लेकर भूमि का भौतिक सत्यापन की है। वहां डैम बनने की संभावनाओं को तलाश कर इसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी। उसके बाद डीपीआर तैयार कर काम शुरू कराया जाएगा। यह डैम बना तो किसानों को काफी लाभ मिलेगा। आरएन प्रसाद, अधीक्षण अभियंता, गालूडीह बराज।

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