पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • बुरुडीह तक पहुंचना मुश्किल, कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, लोगों ने मरीज को साइकिल से पहुंचाया

बुरुडीह तक पहुंचना मुश्किल, कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, लोगों ने मरीज को साइकिल से पहुंचाया

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
डुमरिया से मात्र चार किलोमीटर दूरी पर स्थित बुरुडीह गांव तक पहुंचना मुसीबत बन गया है। आजादी के बाद से ही यहां के ग्रामीण पक्की सड़क की आस में जी रहे हैं। मंगलवार को बुरुडीह गांव की 52 वर्षीय लक्ष्मी बेसरा की तबीयत अचानक खराब हुई। तेज बुखार व सांस लेने में तकलीफ होने के कारण परिजन 108 एंबुलेंस को बुलाए एंबुलेंस तुरंत बुरुडीह के लिये रवाना हो गई लेकिन मरीज के घर पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस रास्ते में कीचड़ में फंस गई। एम्बुलेंस दोपहर 12 बजे फंसी और उसे निकलने में 2 घंटे लग गए। 2 बजे ग्रामीणों के अथक प्रयास से एंबुलेंस को निकाला जा सका। अंत में परिजन मरीज को साइकिल से बिठाकर एंबुलेंस तक लाए तब जाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया। इतनी देर तक मरीज घर में तड़पते रहा। सबसे अहम बात यह है कि पलाशबनी पंचायत के बुरुडीह गांव नक्सल प्रभावित क्षेत्र मे चिन्हित होने के कारण फोकस क्षेत्र में आता है, इसके बावजूद इस गांव की सड़क की यह दशा है, इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। मात्र तीन किलोमीटर सड़क बन जाने से ग्रामीणों की आवागमन की समस्या समाप्त हो जाएगी, बुरुडीह से गोटसाई तक तीन किलोमीटर सड़क बन जाती तो यहां के ग्रामीण नारकीय जिन्दगी से निजात पा जाते। लेकिन सरकारी हुक्मरानों ने इस दिशा मे ध्यान नहीं दिया, नतीजतन हर बरसात में ग्रामीणों को परेशानी से रुबरु होना पड़ता है। इस सड़क पर साइकिल चलाना भी दूभर हो जाता है। सड़क इतना कीचड़मय है कि देखकर ही कोई गांव तक जाने का हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में यहां किसी की मौत नहीं होती। क्योंकि रास्ता इतना कीचड़मय है कि बरसात में यहां यमराज भी नहीं आते।

कीचड़ में फंसी एंबुलेंस और मरीज को ले जाते लोग।

खबरें और भी हैं...