सभी पहाड़िया स्कूलों में मुक्ति सेना ने की तालाबंदी
दुमका| जिले में कल्याण विभाग की ओर से चलाए जा रहे 10 मध्य और दो हाईस्कूल विद्यालयों में पहाड़िया समुदाय के अलावा किसी दूसरी जाति के बच्चों का नामांकन नहीं होता था। राज्य सरकार ने इसमें बदलाव किया है। अब इन विद्यालयों में केवल 25 फीसदी पहाड़िया समुदाय और बाकी 75 फीसद आदिवासी समुदाय के बच्चों का नामांकन का आदेश सरकार द्वारा दिया गया है। पहाड़िया लैंड मुक्ति सेना इसका विरोध करती आ रही है। तीन अप्रैल को बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर नामांकन का आदेश वापस लेने की मांग करते हुए 16 अप्रैल तक का समय दिया था। मियाद समाप्त होने तक सरकार के स्तर पर किसी तरह का निर्णय नहीं लिए जाने से नाराज सेना के सदस्यों ने सभी एक दर्जन विद्यालयों में बेमियादी तालाबंदी कर दी। तालाबंदी के बाद छात्रावास में रहने वाले बच्चे परिजनों के साथ अपने घर लौट गए। मुक्ति सेना के केंद्रीय महासचिव अरिनजल सिंह पहाड़िया का कहना है कि मुख्यमंत्री को इस आशय का पत्र भेजा गया था। सरकार जानबूझ कर पहाड़िया बच्चों को कश्मीरी पंडित की तरह स्कूलों से बाहर करना चाहती है। अगर सरकार की मंशा साफ है तो वह आवासीय विद्यालयों से संथाल व अन्य जातियों के बच्चों के नामांकन का आदेश रद्द करे। जिला कल्याण पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि पहाड़िया मुक्ति सेना के सदस्यों ने जिले में चल रहे एक दर्जन विद्यालयों में तालाबंदी कर दी है। सरकार को सारी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। अब सरकार को ही कोई निर्णय लेना है।