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पति की दीर्घायु के लिए वटवृक्ष में बांधा रक्षा सूत्र

3 वर्ष पहले
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मुफ्फसिल थाना क्षेत्रों में वट सावित्री पूजा को लेकर महिलाएं सुबह से ही वट वृक्ष मैं अपने पति की दीर्घायु को लेकर रक्षासूत्र बांधते नजर आई। जिसे लेकर बनियाडीह, बरहामोरिया, बंदरकूपी, महेशलुण्डी, पपरवाटांड़ समेत अन्य सभी इलाकों में वट सावित्री पूजा को महिलाओं ने बड़े ही श्रद्धा पूर्वक तरीके से मनाया। वहीं पपरवाटांड़ स्थित वट सावित्री पूजा में शामिल महिलाओं ने पूजा से संबंधित जानकारी देते हुए बताया कि यह पूजा आस्था से जुड़ी है। वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा करती हैं। कहते हैं कि गुरुवार को वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है। ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था। इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं । वहीं मौके पर उपस्थित पंडितों ने बताया कि मान्यता के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही सुहागन को जल ग्रहण करना चाहिए। सुबह से ही वटवृक्षों के पार पूजा के ल महिलाएं कतारबद्ध दिखीं।

वट वृक्ष की पूजा करने उमड़ी सुहागिनों की भीड़

भास्कर न्यूज | झारखंडधाम

झारखंडधाम मंदिर परिसर में बरगद पेड़ के चारों ओर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में कई मायनों में खास होता है। इसे सौभाग्य, संतान और पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। इस व्रत वाले दिन सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर बरगद पेड़ के चारों ओर फेरे लगा कर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। इस दिन वट यानी बरगद पेड़ की पूजा करने का प्रावधान है। इस व्रत को वट सावित्री के नाम से इसलिए पुकारा जाता है क्योंकि सावित्री-सत्यवान की कथा का विधान है। वट सावित्री व्रत की तिथि की बात करें तो यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। झारखंडधाम में पूजा करने वालों की अहले सुबह से भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह वट-सावित्री पूजा नियम पूर्वक की गई। रेम्बा, तारा, गांधी चौक, मुरखारी पंडा टोला, बदडीहा, परसन, नईटांड, चुंगलो, भंडारो समेत दर्जनों गांवों में पूजा की गई।

बनियाडीह में वटवृक्ष पर रक्षा सूत्र बांधती महिलाएं।

पति के दीर्घायु को लेकर महिलाओं ने किया वट सावित्री पूजा

भास्कर न्यूज | बिरनी

पति की लंबी आयु को लेकर मंगलवार को बिरनी के लगभग सभी गांवों में महिलाओं ने वट सावित्री का व्रत रख बरगद पेड़ का विधिवत पूजन किया। महिलाएं मंगलवार सुबह से ही स्नान ध्यान करके घर से दूर बरगद पेड़ के पास पूजा-अर्चना करते देखी गई। वट सावित्री की पूजा महिलाओं के लिए खासतौर से अन्य व्रतों से अधिक महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से पति की उम्र लम्बी होती है। वट सावित्री की पूजा करा रहे पंडित कंठेकाल ने बताया कि यह पूजा महिलाओं के लिए खास होता है। इसी दिन सती- सावित्री ने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की थी। उसने पति के प्राण को यमराज के हाथों वापस कराया था। इसीलिए महिलाएं वट-सावित्री की पूजा करती हैं। वट वृक्ष के पूजन को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सभी वृक्षों में बरगद पेड़ की आयु सबसे अधिक होती है। इसीलिए सावित्री का ध्यान कर बरगद के पेड़ का पूजन करने का विधान है।

आस्था के साथ वट की पूजा करती सुहागिनें।

महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक की वट सावित्री की पूजा

डुमरी | प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में मंगलवार को वट-सावित्री पूजा श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस मौके पर सुहागिनों ने बट वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधा, सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण किया और पूजा अर्चना की। वट सावित्री पूजा को लेकर मंगलवार सुबह से ही प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित वट वृक्षों के समीप सुहागिनों की भीड़ जमा होने लगी। इस दौरान सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की, रक्षा सूत्र बांधा, प्रसाद चढ़ाया, सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण किया और अखंड सौभाग्य की कामना की।

सुहागिनाें में रहा उत्साह

द्वारपहरी | द्वारपहरी समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वट-सावित्री पूजा को लेकर सुहागिनों में उत्साह देखा गया। सुबह से दोपहर तक वट वृक्ष के नीचे वट-सावित्री पूजा को लेकर भीड़ जमी रही। पूजा करते पति के दीर्घायु होने की कामना की। पूजा को लेकर फलों के दुकानों में भीड़ उमड़ी। पूर्व में 35 से 40 रुपए दर्जन बिकने वाला केला अस्सी रुपए वहीं सेव का भाव 200 रुपए हो गया।

वट-सावित्री व्रत पर तिसरी में सुहागिनों ने की वट वृक्ष की पूजा

व्रत के बाद सुहागिनें एक-दूसरे के माथे पर सिंदूर लगाती हुईं।

तिसरी | तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित मिशन मध्य विद्यालय प्रांगण में अवस्थित वट वृक्ष का सुहागिनों ने मंगलवार को पूजन किया। जिसमें तिसरी चौक, हटिया टांड, साव टोला, दास टोला, गरहीटांड मोड़, जमुनिया टांड इत्यादि गांवों और टोलों से लोग पहुंच कर वट वृक्ष की पूजा व आरती की। जानकारी के अनुसार वट-सावित्री का व्रत हिंदू धर्म में कई मायनों में खास होता है। इससे सौभाग्य, संतान और पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ के चारों ओर फेरे लगा कर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करने का प्रधान है। इस व्रत को वट सावित्री के नाम से इसीलिए पुकारा जाता है क्योंकि सावित्री-सत्यवान की कथा का विधान है। वट सावित्री व्रत की तिथि की बात करें तो यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष मंगलवार के दिन बड़े आस्था ओर उमंग के साथ यह व्रत किया जा रहा है। इस मौके पर पूजा में गीता देवी, कांति देवी, आरती देवी, तेरेसा हांसदा, सावित्री देवी, उमा देवी, मालती देवी, रीना देवी, सुनीता देवी, गुड़िया देवी, पुष्पा देवी समेत दर्जनों लोग शामिल थीं।

पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ हुई वट सावित्री पूजा

जमुआ | जमुआ प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में वट सावित्री का व्रत सुहागिनों ने बड़ी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया। अहले सुबह सुहागिनें स्नान आदि से निपट कर रंग-बिरंगे वस्त्र धारण कर पूजा की थाली लेकर वट वृक्ष की पूजा करने गई। वट वृक्ष की पूजा कर उसे रक्षा सूत्र से बांध अचल सुहाग की कामना की। सुहागिनों ने फल एवं सिंगार प्रसाधनों से पूजा की और पारंपरिक गीत गाकर परिक्रमा की। मान्यता है कि पूजा से सुहागिनों के सुहाग अचल रहते हैं। वट सावित्री पूजा जमुआ, मिर्जागंज, खरगडीहा, हरला, रेम्बा, शाली, पिंडरसोत, पोबी, धुरैता, तारा, चुंगलो, कठवारा आदि जगहों में की गई।

धनवार | धनवार सहित प्रखंड क्षेत्र के डोरंडा, खोरीमहुआ, घोड़थंबा, नवागढ़ चट्टी आदि कई इलाकों में बट सावित्री का पर्व धूम धाम से मनाया गया । जिसमें सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना की। वहीं पंडित मनोज शास्त्री ने बट सावित्री व्रतियों को पतिव्रता नारी होने का संदेश देते हुए विधिवत पूजा करवाई। वहीं सुहागिनों ने मानव शास्त्री का वचन से संतुष्ट होकर पति की दीर्घायु होने और लंबी उम्र की कामना की।

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