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बाल विवाह था, पढ़ने की इच्छा पर ससुराल ने साथ दिया, शिक्षिका बनने की तैयारी

3 वर्ष पहले
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डूंगरपुर-बांसवाड़ा में करीब 20 हजार की जनसंख्या वाले रेबारी समाज में 10 साल पहले बाल विवाह की परंपरा थी। परिवारों में 13 साल की उम्र होते ही बेटियों का विवाह करा दिया जाता था, लेकिन इन 10 सालों में समाज बदल गया है। अब समाज की बेटियों का बाल विवाह नहीं हो रहा है, इसकी जगह पर बेटियां पढ़ने और आगे बढ़ने में रुचि दिखा रही है। बेटियों के इस प्रयास को समाज ने भी समझा और इन्हीं बेटियों को समाज स्वयं आगे बढ़ा रहा है।

10 साल पहले जिन बेटियों का बाल विवाह हुआ था। इन बेटियों ने बाल विवाह की परंपरा को भुलाकर अब एसटीसी, बीए और एमए तक की शिक्षा हासिल कर ली। स्वयं भी आगे बढ़ रही है तो दूसरी बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। दरअसल खेती, ऊंट और दूध के धंधे से जुड़े इस समाज की बोलचाल और भाषा भी मेवाड़ी है। पहले इस समाज की बेटियों को ज्यादा पढ़ाया नहीं जाता था और कम उम्र में ही बाल विवाह करा दिया जाता था।

एक बेटी पंचायत समिति सदस्य है तो दो बेटियां बीए और एमए कर समाज को दे रही संदेश

बाल विवाह को भी सकारात्मक लिया, पति के सहयोग से आगे बढ़ी

लिम्बोड़ गांव की इन बेटियों के पतियों ने भी काफी सहयोग किया। लिम्बोड़ निवासी भगवती पुत्री लक्ष्मण रेबारी, माया पुत्री रतनलाल रेबारी और कमला पुत्री राजाराम रेबारी का बाल विवाह 10 साल पहले हुआ था। वर्तमान में भगवती पहली बेटी है समाज की, जो पंचायत समिति सदस्य है ओर अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। बाकी दोनों माया और कमला ने एसटीसी और बीए कर ली है और रीट की तैयारी कर रही है।

लिम्बोड में 10 साल पहले हुए बाल विवाह की तस्वीर और वर्तमान में ये बेटियां जो उच्च शिक्षा हासिल कर रही है।

तीन माह पहले पढ़ने वाली बेटियां सम्मानित

गड़ाझुमजी में तीन माह पहले ही सामाजिक सम्मेलन हुआ था। इसमें समाज ने सामाजिक बुराइयों को दूर कर समाज को आगे बढ़ाने का प्रण लिया था। इन्हीं प्रयासों को समाज की युवा शाखा रेबारी युवा सेवा संस्थान और वरिष्ठ पदाधिकारी आगे बढ़ा रहे हैं। समाज की पढ़ने वाली बेटियों को भी सम्मानित किया गया।

हमारे समाज में 10 साल पहले बुराइयां थी, बाल विवाह होते थे, लेकिन अब समाज बदल चुका है। समाज की बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है। समाज के युवा और बुजुर्ग इस बदलाव का हिस्सा बनकर समाज को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। - महेश चौधरी, सचिव रेबारी युवा सेवा संस्थान

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