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भीषण गर्मी में भूजल स्तर में गिरावट, सूखने के कगार पर बांध-तालाब

3 वर्ष पहले
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इस बार गर्मी चरम पर है। नदियों में पानी सूख चुका है तो तालाबों और बांध में पैंदा ढकने के बराबर ही बचा है। पारा पिछले एक सप्ताह से 45 डिग्री के आसपास बना हुआ है, ऐसे में अगले कुछ दिनों में पानी का संकट खड़ा हो सकता है।

जिले में कुल 19 बड़े बांध तालाब हैं। सोम कमला आंबा, मेवाड़ा और मारगिया बांधों को छोड़ दें तो स्थितियां काफी गंभीर हैं। अमरपुरा बांध से आसपास के कई गांवों में पेयजल की सप्लाई भी पाइपलाइन से होती है, लेकिन इसमें करीब दो मीटर ही पानी बचा है जो बारिश आने तक लोगों की प्यास बुझा सके, इसे लेकर संशय बना हुआ है। राहत की खबर यह है कि 65 गांवों में पेयजल की सप्लाई के सोम कमला आंबा बांध में अभी पर्याप्त पानी है जो पिछले साल के मुकाबले एक मीटर ज्यादा है। ऐसे में बारिश एक माह देरी से 15 जुलाई तक भी आएगी तो भी 15 जुलाई तक किसी तरह की समस्या इन गांवों में पेश आने की संभावना नहीं बनती। वहीं मारगिया बांध में भी पानी इतना है आसपास के गांवों में लिफ्ट से पानी खींचकर प्यास बुझाई जा सकती है। इन बांधों में पानी होने से करीबी गांवों का जल स्तर तो ठीक है। वहीं शहर और आसपास के गांवों के लिए बुरी खबर भी है। शहर में पेयजल की सप्लाई हाल में डिमिया और एडवर्ड समंद से होती है। व्यवस्थाएं बेपटरी नहीं हुई, लेकिन तमाम हैंडपंप और बोरवेल अब हांफने लगे हैं। शहर की सबसे बड़ी आबादी हाउसिंग बोर्ड, न्यू कॉलोनी में भूजल स्तर 200 फीट तक नीचे चला गया है। वहीं शहर के आसपास 15 किलोमीटर के दायरे में पानी 140 फीट तक नीचे चला गया है।

डूंगरपुर। सूखने के कगार पर पातेला तालाब।

प्राइम इंफो

कुल तालाब- 19

8 में पैंदा ढकने जितना पानी भी नहीं बचा

5 में 2 मीटर से ज्यादा पानी

बड़ा कारण...अवैध बोरवेल का कारोबार

शहर सहित जिलेभर में बोरवेल का अवैध कारोबार जोर-शोर से चल रहा है। एक-एक बोरिंग करने के 60 हजार से एक लाख रुपए तक ऑपरेटर्स वसूल रहे हैं। ऐसे में भूजल स्तर में बड़ी गिरावट लगातार बनी हुई है।

शहर के दो तालाब खाली होने की स्थिति में

शहर के पातेला तालाब में पानी लगभग खत्म हो चुका है। वहीं शहर के प्रवेश मार्ग पर बने सुनेरिया तालाब का जल स्तर भी काफी कम ही रहा है। यही हालत बोरवेल की भी है।

शहर में पेयजल समस्या के लिए 600 रु. में टैंकर बने लाइफलाइन

शहर में पानी की समस्या जिन क्षेत्रों में ज्यादा है वहां दो-दो परिवार 600 रुपए प्रति टैंकर चुका रहे हैं। ऐसे में टैंकर का कामकाज तो खूब चल रहा है, लेकिन जिन कुओं से टैंकर भरे जा रहे है, वे भी भूजल स्तर गिरावट का बड़ा कारण है। इसमें पुराने शहर और ब्रह्मस्थली कॉलोनी के कुछ कुएं उपयोग में लिए जा रहे हैं।

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