जीवन में योग उन्नति का मार्ग है, जबकि भोग अवनति का कारण है। परनारी से हमें बचना होगा, हमें जीवन में सदाचार अपनाना होगा।
पुरुष अपनी प|ी के अलावा प्रत्येक नारी में मां, बहन, बेटी को मानना होगा तथा प्रत्येक नारी को अपने पति के अलावा प्रत्येक पुरुष में पिता, भाई पुत्र देखना होगा तथा भाई-बहन के पवित्र रिश्तों की पवित्रता रखनी होगी। यह उदगार मुनि प्रमाण सागर महाराज ने दिगंबर जैन मंदिर मुनिसुव्रतनाथ जिनालय के संत भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज समय के साथ सब कुछ बदल गया है। आधुनिकता की दौड़ में हम रिश्तों को भूल चुके हैं। रिश्तों की पवित्रता ही हमारी उन्नति का कारण है। हम नैतिक पतन की ओर जा रहे हैं। हमें जीवन में संयम को अपनाना होगा।
धर्म-समाज-संस्था
डूंगरपुर। मुनि प्रमाण सागर महाराज का पाद पक्षालन करते श्रद्धालु।
जीवन में चार बातें याद रखें
महाराज ने कहा कि जीवन में चार बातें याद रखनी चाहिए। पहली बात हमारा नैतिक पतन न हो और संयमी जीवन जीयें। दूसरी बात हमारे जीवन की निजी बातें दूसरों को नहीं बतानी चाहिए, वचनों में संयम रखें, खान-पान में संयम रखें, पर नारी से पुरुष को अकेले में नहीं मिलना चाहिए। हमारे जीवन में ये चार बातें महत्वपूर्ण हैं, जिससे सुखी जीवन का मार्ग प्रशस्त होगा तथा जीवन सुखमय व शांतिमय बना रहेगा। इस अवसर पर भाजपा के प्रवक्ता एवं समाजसेवी प्रकाश पंचाल एवं गुणयतन के संरक्षक व ट्रस्टी तथा बांसवाड़ा से श्रीपाल भुखिया सहित अतिथियों ने मुनि को श्रीफल भेंट किया। संचालन उदयपुर निवासी कुंथुकुमार जैन ने किया।