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जीवन में संतोष ही सुख का कारण : मुनि प्रमाण सागर

3 वर्ष पहले
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जिसमें संतोष का भाव समाहित हो जाता है, वह व्यक्ति जीवन में कभी दु:ख का सामना नहीं करता है और वह सदैव सुखमयी जीवन व्यतीत करता है। यह बात मुनिश्री प्रमाण सागर ने नियमित व्याख्यान माला के तहत सोमवार को मुनिसुव्रतनाथ स्वामी मंदिर परिसर में उपस्थित धर्म प्रेमियों से कहे।

उन्होंने कहा कि परधन का लालच न करें। हमेशा अपने धन पर संतोष करें। धन कमाना कोई बुरा नहीं है, किन्तु धन हम पर हावी नहीं होना चाहिए। हम धन पर हावी रहें, जिससे कि मन में लालच पैदा न हो। मुनि ने कहा कि हमें जीवन में चार बातों का ध्यान रखना चाहिए। ये चार बातें जिसमें ओवर एस्टीमेट, ओवर बर्डन, ओवर कॉन्फिडेंस व ओवरटेक, यह जीवन में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ओवर एस्टीमेट कर व्यापार न करें। कभी जीवन में कर्ज का बर्डन न लें। ओवर कॉन्फिडेंस होकर अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज न लें और कभी किसी को ओवरटेक न करे कि वह हमारे से व्यापार में बढ़ गया है तो मुझे भी ऐनकेन प्रकारेण उससे आगे बढ़ना है। यह ओवरटेक हमें कभी भी गर्त में डाल कर गिरा सकता है। अत: धन कमाना बुरा नहीं है, किन्तु धन हमारे ऊपर हावी हो यह बुरा है।

इसलिए हमें संतोषी बने रहने में ज्यादा फायदा है, जिसे हमें कोई नुकसान नहीं होगा। और हमारा जीवन संतोषमयी बना रहेगा। इस अवसर पर प्रात: चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट व पाद पक्षालन तथा श्रीफल भेंट भींडर, बड़ोदिया वाले धर्म प्रतिनिधियों ने किया। इस मौके पर भींडर व बड़ोदिया से आए धर्म प्रतिनिधियों ने महाराज को श्रीफल भेंट कर आगामी चार्तुमास के लिए आग्रह किया।

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