पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • तेंदूपत्ता संग्रहण के ठेके में 2 करोड़ का गबन, ठेकेदार ने वनपाल के फर्जी हस्ताक्षर कर बनाया ट्रांजिट परमिट, जांच में पकड़ा गया, अब एफआईआर

तेंदूपत्ता संग्रहण के ठेके में 2 करोड़ का गबन, ठेकेदार ने वनपाल के फर्जी हस्ताक्षर कर बनाया ट्रांजिट परमिट, जांच में पकड़ा गया, अब एफआईआर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
तेंदूपत्ता संग्रहण के ठेके में दो करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया है। वन विभाग की ओर से किए गए ठेके के क्षेत्रफल से बाहरी जंगल का पत्ता भी संग्रहित कर लिया गया।

मामला तब सामने आया, जब मूल ठेके की रकम ठेकेदार ने जमा नहीं कराई तो विभाग ने गोपनीय जांच में चोरी की पुष्टि की। दो माह पहले पुलिस से शिकायत की गई थी। पुलिस अब तक प्रक्रिया को ही नहीं समझ सकी है, ऐसे में जांच को लेकर संशय की स्थिति है। मैसर्स उवेश नद्दाफी ने साल 2017 में वेड़ वन क्षेत्र से तेंदूपत्ता संग्रहण का ठेका 2 करोड़ 2 लाख 30 हजार रुपए में लिया था। इसके लिए एक फरवरी 2017 को 30 लाख 34 हजार 500 रुपए की बैंक गारंटी ली गई थी। इसके बाद पत्ता संगहण की अनुमति मांगी थी जो जारी भी की गई थी। इसके लिए विभाग के साथ बाकायदा कानूनी इकरारनामा दाखिल किया गया था। ठेकेदार ने प्रतापगढ़ में एक किराए का गोदाम लेकर बताया था कि वह जो पत्ता संग्रहित करेगा, उसे प्रतापगढ़ के उसी गोदाम में जमा करेगा। हालांकि गोदाम की जानकारी भी विभाग को दी गई थी।

एक साल बाद भी राशि जमा नहीं कराई तो हुआ शक

ठेकेदार ने तीन हजार मानक बोरे पत्ता परिवहन के लिए टीपी (ट्रांजिट परमिट) की मांग की थी। विभाग ने इकरारनामे के अनुसार 23 मई को टीपी जारी की। इसी बीच विभाग को खबर मिली कि वेड़ क्षेत्र में जितना तेंदूपत्ता का ठेका हुआ था, उसकी जगह पूरा ही संग्रहित कर वहां से चुरा लिया गया। जांच की गई तो वास्तव में मौके से पूरा तेंदूपत्ता संग्रहित कर लिया गया था। पूरा पत्ता ले जाने के लिए वनपाल के हस्ताक्षरशुदा सहायक टीपी की भी जरूरत थी, लेकिन फर्म ने विभाग के फर्जी हस्ताक्षरों से पूरे पत्तों का संग्रहण कर लिया।

नोटिस देने के बाद भी फर्म ने नहीं सुनी

रेंजर बद्रीलाल ने शिकायत में बताया कि ठेके से ज्यादा पत्तों के संग्रहण कर ले जाने की खबर के बाद प्रतापगढ़ में बताए गोदाम की जांच एसीएफ फुरकान अली के नेतृत्व में एक टीम ने की। मौके पर बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता था। इस पर मौजूद फर्म के प्रतिनिधि ने बताया था कि अन्य जगहों से संग्रहित पत्ता भी उसी गोदाम में रखा है। पत्ता संग्रहण की राशि की किश्तें समय पर जमा नहीं हुई तो विभाग ने फर्म को कई बार नोटिस भेजे। इसके बाद 20 नवंबर को जवाब दिया गया कि पूरी राशि जमा करा दी जाएगी। फिर भी जब बात नहीं बनी तो जमा बैंक गारंटी से वसूली के लिए बैंक प्रबंधक को पत्र लिखा गया। शेष राशि ब्याज सहित जमा कराने के लिए फिर नोटिस भेजा। उसे लेकर भी फर्म ने ना तो पैसा जमा कराने की मोहलत मांगी और न ही जवाब दिया।

चेताया कि पूरे गोदाम की होगी जांच, फिर भी बेखौफ

आखिर में विभाग ने फर्म को नोटिस भेजा कि 17 जनवरी 2018 को प्रतापगढ़ के गोदाम का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए फर्म के मालिक टोंक निवासी उवेश नद्दाफी को स्वयं उपस्थित रहने को कहा गया, लेकिन सत्यापन के दौरान न तो वह स्वयं उपस्थित हुए और न ही उनका प्रतिनिधि। सत्यापन किया गया तो गोदाम में 2178 बोरे ही पाए गए, जबकि ठेकेदार ने विभाग को जानकारी दी थी कि उसने 4 हजार बोरे संग्रहित कर रखे हैं। ऐसे में 1822 बोरे गोदाम में नहीं थे।

एफआईआर दर्ज, जांच जारी

वन विभाग के रेंजर ने टोंक की फर्म के खिलाफ राशि नहीं चुकाने और फर्जी साइन करने जैसी शिकायत की थी। एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। हमने रेंजर से पत्रावलियां मंगवाई हैं, जिससे पहले प्रक्रिया को समझा जा सके। इसके बाद ही जांच आगे बढ़ सकेगी। दोषी होने पर कार्रवाई की जाएगी। - भगवानसिंह, थानाधिकारी, रामसागड़ा

पुलिस को पत्रावलियां पेश की, रिपोर्ट भी दी

हमने पुलिस को रिपोर्ट दी थी, उसके साथ सभी पत्रावलियां भी पेश की है। मैं अभी छुट्टी पर हूं, वापस आकर पता करवाते हैं कि अब तक जांच की क्या स्थिति है। जांच के बाद आला अधिकारियों को भी पत्र लिखकर कार्रवाई करेंगे। - डॉ. एस. सरथ बाबू, डीसीएफ, वन विभाग

खबरें और भी हैं...