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ज्ञान के अथाह भंडार थे गुरु ज्ञानसागर महाराज

3 वर्ष पहले
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आचार्य गुरु विद्यासागर महाराज के गुरु ज्ञान सागर महाराज यथा नाम तथा काम से चरितार्थ होते हैं। ज्ञान सागर महाराज द्वारा 16 ग्रंथों की रचना कर देश को बड़ी निधि दी है। कवि कालीदास की तरह प्रचंड विद्वान को आज हम याद कर अपने आपको धन्य मान रहे हैं। यह उदगार संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य एवं शंका समाधान के प्रणेता मुनि प्रमाण सागर महाराज एवं मुनि विराटसागर महाराज ने दिगंबर जैन मुनिसुव्रतनाथ जिनालय के विद्यासागर संत भवन में व्यक्त किए। मुनि विराटसागर महाराज ने गुरु ज्ञानसागर महाराज का जीवन परिचय देते हुए बताया कि भूरालाल ग्रहनाम से माने जाने वाले में ज्ञान का अथाह भंडार था। ज्ञान सागर महाराज ने कड़े विरोध के बावजूद विद्याधर नामक बालक को मुनि दीक्षा देने का दृढ़ निश्चय कर लिया। इन्होंने इसमें गुण देखे एवं दीक्षा देकर विद्यासागर नाम दिया, जिनका डंका पूरे विश्व में बज रहा है। मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान सागर महाराज ने अपने अंतिम समय में आचार्य पद त्याग कर विद्यासागर महाराज को आचार्य पद देकर कहा कि मुझे समाधि मरण दिलाएं। ऐसा दृष्य दिखना ही असंभव है। एक आचार्य अपने शिष्य को आचार्य का पद देकर उनसे समाधि मरण के लिए विनती कर रहे हैं। ऐसे महान संत के चरणों में हम सभी का वंदन है। इससे पूर्व बड़े बाबा एवं आचार्य विद्यासागर महाराज का चित्र का अनावरण उदयपुर निवासी प्रकाश-सुनीता खेरीवाल एवं सिंगापुर निवासी सुनील भैया द्वारा भी श्रीफल भेंट कर पाद पक्षालन एवं दीप प्रज्वलन कर शास्त्र भेंट किया। सुबह 7 बजे गुरुनाम ज्ञानसागर महाराज एवं आचार्य गुरुवर विद्यासागर की महाराज की पूजा अर्चना मुनि प्रमाण सागर के सानिध्य में धूमधाम के साथ मनाई गई।

डूंगरपुर. मुनि प्रमाणसागर महाराज प्रवचन देते हुए और जैन समाज की ओर से रक्तदान करते समाजजन।

शाम को रक्तदान हुआ

शाम 4 बजे विद्यासागर नवयुवक मंडल द्वारा रक्तदान किया गया। नवयुवक मंडल के अध्यक्ष पंकज नागदा ने बताया कि ब्लड बैंक टीम मेडिकल कॉलेज डूंगरपुर की ओर से ब्लड बैंक प्रभारी अधिकारी डॉ. राजेश सरैया, डॉ. प्रभाष भावसार, जिला संयोजक पदमेश गांधी, राजेंद्र सेवक, गौरव पंचाल, अनिल त्यागी, हनुवीरसिंह, हसीब खान, विनोद दोशी व हर्षवर्धन जैन के सानिध्य में संत भवन में लगभग 15 लोगों ने रक्तदान किया। कार्यक्रम का संचालन कुंथु कुमार द्वारा किया गया।

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