श्रीनाथ मंदिर में नानीबाई रो मायरो कथा का समापन
भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर
शहर के गेपसागर झील की पाल स्थित श्रीनाथ मंदिर में तीन दिवसीय नानीबाई रो मायरो कथा का समापन मंगलवार को हुआ। कथाकार दीपेन व्यास ने बताया कि भगवान कृष्ण नानीबाई के भाई बनकर आते हैं और नानीबाई के 56 करोड़ का मायरा भरते हैं। भगवान श्रीकृष्ण, राधा, रुक्मिणी, रिद्धि-सिद्धि को लेकर मायरा भरते हैं। नरसीजी की भक्ति और धन्य है भक्तों की भगवान इच्छा हमेशा पूरी करता है।
कथाकार व्यास ने बताया कि भगवान कृष्ण कहते हैं जो भक्त मुझ पर विश्वास रखता है, उसकी सभी जिम्मेदारी भगवान संभालते हैं। नरसी जी की कथा सुनाते हुए कहा कि नरजी जी बहुत निर्धन थे। खुद के घर में ज्वार भी खाने के लिए नहीं थे। भाई-बंधु, परिवार, लोग और समाजजनों ने नरसी जी को बहुत कुछ कहा, लेकिन नरसीजी ने किसी की परवाह नहीं की। नानीबाई के सुसराल वाले धन के लोभी थे उन्होंने ने मायरे की आवश्यकता से अधिक धन मंगवाया है। जिस पर उन्होंने भगवान कृष्ण की भक्ति की। इस पर भगवान प्रसंन्न होकर भक्त के सहयोग के लिए पहुंच गए। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के तहत एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि नारद जी और भक्ति के बीच में संवाद होता है, उसमें भक्ति अपना परिचय देती है कि उसका जन्म द्रविड देश में हुआ था। वहीं कर्नाटक में पली-बढ़ी हुई थी। महाराष्ट्र में उसका सम्मान हुआ, लेकिन जैसे ही वह गुजरात में आई उसके जीर्ण-शीर्ण हो गई। गुजरात में नरसी जी के जन्म के पहले भक्ति न के बराबर थी लेकिन नरसीजी के जन्म के बाद भगवान के आशिर्वाद से भक्त नरसी मेहता ने धर्म का प्रसार-प्रचार किया। कथा में नारायण मालपाणी, शारदा मालपाणी, सुशीला जोशी, गजेंद्र श्रीमाल, शकुंतला कंसारा सहित श्रद्धालु मौजूद थे।