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किसी ने सास के नाम से तो किसी ने रिश्तेदार के नाम से बनाए कैटल शेड, सरकार को दिया 82 हजार का झटका

3 वर्ष पहले
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महात्मा गांधी नरेगा की योजनाओं को सरपंचों और ग्राम पंचायतों ने भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्लेटफार्म बना दिया है। ऐसा ही उदाहरण ग्राम पंचायत पूंजपुर में मिला। कस्बे से करीब 2 किमी दूर आसपुर मार्ग पर एक होटल के पास ही एक छोटा सा पशुघर बनाया हुआ है।

इस पशुघर को बने हुए 2 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक इसमें कोई पशु नहीं बांधा गया। खास बात तो यह है कि यह पशुघर सरपंच की सास के नाम से बना हुआ है। मुख्य मार्ग से 10 कदम की दूरी पर बने इस पशुघर में लकड़ी के गट्टे रखे हुए थे, जिसका उपयोग होटल संचालक करते हैं। बाहर गिट्टी रखी थी, जिसका उपयोग सरपंच पति द्वारा लिए जा रहे ठेके के लिए किया जाता है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां पर कभी भी पशु नहीं बांधे गए हैं। साथ ही बनाने का उद्देश्य दूसरे कार्यों के लिए था।

पशुघर के पास होटल, यहां न तो पशु बांधे जाते है और न ही कभी बांधे है। ये सरपंच की सासू के नाम से बनाया गया है।

जिले में 5 हजार से ज्यादा पशुघर

दूसरी ओर, महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत डूंगरपुर जिले में 5 हजार से ज्यादा पशुघरों को निर्माण कराया गया है। इसमें 70 से 90 हजार रुपए तक का बजट दिया गया है। एक पशुघर को बनाने में खर्च किए गए इस बजट में से करीब 40 हजार रुपए का ही पशुघर बने हुए हैं, लेकिन बाकी के बजट का उपयोग सरपंचों और अधिकारियों के कमिशन में लगाया गया है। खास बात तो यह है कि कैटल शेड बनाने की इस योजना में करोड़ों रुपए लगाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इसमें से 50 फीसदी रुपए सरपंचों और अधिकारियों की जेबों में जा रहे हैं।

यह थी योजना

दरअसल, मनरेगा के तहत सरकार ने पशुघर की योजना बनाई थी। इसमें मनरेगा से ही निर्माण करना था। इसमें ऐसे परिवारों का चयन करना था, जिनके पास 5 से ज्यादा पशु हैं और उन्हें बांधने की दिक्कत आती है। ऐसे में पशुघर बनाने की जिम्मेदारी पंचायत की थी। लेकिन ऐसी जगह पर बनवा दिए हैं, जहां पर उपयोग ही नहीं हुआ है।

पशुघर में रखे लकड़ी के गट्‌टे और पशु घर में लिखा हुआ नोटिस ।

हमारे यहां पर पशुघर में पशु बांधते हैं। ऐसी कोई बात नहीं है। ये मेरी सास के नाम से बनाया गया है। हमारे मवेशी खेतों में ही बांधे जाते हैं। - हेमलता मीणा, सरपंच पूंजपुर

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