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प्लॉट खरीदते वक्त रहें सावधान, प्रॉपर्टी डीलर को ही खड़ा करना है बिजली तंत्र

3 वर्ष पहले
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अगर आप प्लॉट, मकान, दुकान और जमीन खरीद रहे हैं तो एक बार उस एरिया में बिजली की लाइनें बिछी हुई है या नहीं, यह जरूर जांच लें। बिजली लाइनों को खींचे बगैर रियल एस्टेट से जुड़े लोग खरीद-फरोख्त का काम कर रहे हैं। इससे जमीन पर मकान और दुकान बनाने वालो को बिजली का कनेक्शन लेते समय हजारों रुपए डिमांड के रूप में जमा करानी पड़ रही है।

नई कॉलोनी, हाउसिंग सोसायटी और प्लॉट की प्लानिंग बन रही है, लेकिन किसी भी प्रॉपर्टी डीलर ओर से डिस्कॉम के नियमानुसार बिजली तंत्र स्थापित नहीं किया जा रहा है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार वे इसका पैसा पहले ही खरीदार से वसूल कर लेते हैं। होता ये है कि खरीददारों को बिजली कनेक्शन लेने में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वे डीलर को पैसा दे चुके होते हैं और फिर से डिस्कॉम के चक्कर लगाना बाकी रहता है। पूरे जिले में अभी तक सिर्फ दो ही प्रॉपर्टी डीलर ने फाइलें जमा कराई थी। इसके बाद उनका प्रोजेक्ट भी पूरा हो चुका है, जबकि एक दर्जन से अधिक कॉलोनी के प्लॉट काटे जा रहे हैं। सरकार के नियमानुसार शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में नए क्षेत्र में बिजली तंत्र स्थापित करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार, फर्म और भूमि दलाल की होती है। टाउन प्लान से अपने प्लानिंग की मंजूरी दिलाने के बाद डिस्कॉम से अनुमति लेकर पूरे क्षेत्र में बिजली तंत्र लगाना अनिवार्य कर रखा है। इसमें संबंधित प्लॉट की साइज के आधार पर बिजली के पोल, वायर, ट्रांसफार्मर और बिजली के उपकरण स्थापित करके वहां पर बिजली व्यवस्था संबंधित ठेकेदार को करनी है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन लेते समय आर्थिक भार नहीं पड़े।

प्रॉपर्टी डीलर को ही खुद बिछानी होगी बिजली की लाइन, धोखे में आकर न करें लेनदेन

नियम बने एक साल हुए, दो फाइल ही आई

नियम के बने करीब एक वर्ष से अधिक समय गुजर चुका है। इसके बावजूद डिस्कॉम में जिलेभर में फिलहाल दो ही फाइल जमा हुई है, जबकि जिलेभर में रियल स्टेट की 10 से अधिक बड़ी फर्म रजिस्टर्ड हैं। वहीं करीब 20 से अधिक भूमि दलाल जमीन खरीद कर बिजनेस कर रहे हैं। डूंगरपुर शहर में पांच बड़े रियल स्टेट के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सागवाड़ा में भी 4 बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक डिस्कॉम के पास दो ही फाइलें जमा हुई है। डिस्कॉम के पास सुपरविजन चार्ज जमा भी नहीं हुआ है। डिस्कॉम के राजस्व नुकसान के साथ ही उपभोक्ताओं को भी आर्थिक भार उठाना पड़ रहा है।

इसलिए जरूरी है बिजली तंत्र

टाउनशिप प्लानिंग के अनुसार नए मकानों और व्यावसायिक उपक्रम में बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। ऐसे में कोलोनाइजर टाउनशिप प्लानिंग के अनुसार 33 केवी, 11 केवी, ट्रांसफार्मर और अन्य बिजली के उपकरण पहले से ही खड़े कर तैयार रखती है। इससे भविष्य में बिजली के पोल, वायर और ट्रांसफार्मर लगाने में परेशानी नहीं होती है।

सभी एईएन और जेईएन को सरकुलर भेज रखा है। जितनी भी नई कॉलोनी, टाउनशिप, बैगलोज और प्लॉट काटे जा रहे हैं, उसका सर्वे कराया जाएगा, ताकि उसको खरीदने वाले उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान नहीं हो। इसके साथ ही कोलोनाइजर को पाबंद किया जाएगा।\\\'\\\' एनएल सालवी, एसई, डिस्कॉम डूंगरपुर

उपभोक्ताओं को होता है दोहरा नुकसान

कोलोनाइजर की ओर से कॉलोनी और प्लॉट बेचने पर उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। शहर के आसपास नई कॉलोनी में मकान निर्माण के समय कनेक्शन लेते समय पोल, बिजली के तार खींचने में कम से कम 20 हजार और अधिक से अधिक 60 हजार तक की डिमांड बनती है। ऐसे में पहले मकान बनाने वाले उपभोक्ताओं को नुकसान होता है। बाद में प्लॉट और मकान के फैलाव होने के बाद डिमांड बढ़ती और घटती जाती है।

हर टाउनशिप की बनानी है बिजली प्लानिंग

मकान, दुकान, प्लॉट और जमीन बेचने वाले व्यक्ति और फर्म को अपना बिजली तंत्र स्थापित करने का नियम है। इस प्लान में बिजली के पोल, 33 केवी बिजली तार, 11 केवी बिजली तार और एलटी लाइन खड़े स्थापित करने का प्लान होता है। इसके साथ ही प्लॉट और मकान पर बिजली के लोड के आधार पर ट्रांसफार्मर स्थापित करने की संख्या और जगह भी दिखानी होती है। डिस्कॉम की ओर से 15 प्रतिशत सुपरविजन चार्जेज जमा कराने के बाद कोलोनाइजर अपनी व्यवस्था से बिजली प्लानिंग के अनुसार बिजली लाइनें खड़ी कर सकता है।

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