मंडल में 13 लाख परिवारों को होगा फायदा, कर्मचारियों के बनाए जाएंगे सीटीएसई कार्ड
डूंगरपुर। सुप्रीम कोर्ट ने 44 लाख वर्तमान और रिटायर्ड केन्द्रीय कर्मचारियों को देश के किसी भी निजी अस्पताल में मेडिकल सुविधा देने के आदेश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि बेहतर चिकित्सा कर्मचारी का अधिकार है, इसलिए केंद्र सरकार ऐसे किसी भी बिल का भुगतान करने से मना नहीं कर सकती।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की पालना के लिए ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी को पत्र भेजकर आदेश की पालना की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अगर कर्मचारी ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया है जो पैनल में शामिल नहीं है तो सरकार को यह देखना जरुरी है कि क्या वाकई में संबंधित व्यक्ति ने इलाज कराया या नहीं। इलाज कराने पर बिल का भुगतान नहीं रुकना चाहिए। अभी तक केवल एक रेल मंडल में कुछ ही निजी अस्पताल अनुबंधित हैं। कई निजी अस्पताल में सुपर स्पेसिलिटी की सुविधा भी नहीं है।
पेंशनरों पर पहले लागू करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना सबसे पहले रिटायर्ड रेल कर्मचारी, अधिकारी व उनके परिवार के सदस्यों के लिए लागू किए जाने की आवश्यकता है। इस बात को रेलवे प्रबंधन ने भी स्वीकार किया है। इसके लिए कर्मचारियों के सीटीएसई कार्ड तैयार होंगे। उन सभी लोगों को कार्यालय में आवेदन करना होगा।