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ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मान समारोह में कई कांग्रेस नेता दरकिनार, जिलाध्यक्ष की सफाई- ये तो समारोह था ही नहीं

3 वर्ष पहले
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जिले में कांग्रेस के नए ब्लॉक अध्यक्षों की घोषणा के बाद से ही जिले की पांच में से चार विधानसभा क्षेत्रों में नेताओं और कार्यकर्ताओं में अंदरूनी विरोध बढ़ रहा है। हाल ही में कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष चांदमल जैन के नेतृत्व में हुए ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मान समारोह में यह स्थिति सामने आ गई। इस समारोह में केवल विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया व छोटी सरवन प्रधान राजेश कटारा ही शामिल हुए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य और गढ़ी से पूर्व विधायक कांता भील, प्रदेश कांग्रेस सचिव और बांसवाड़ा से पूर्व विधायक अर्जुन बामनिया के अलावा घाटोल और कुशलगढ़ क्षेत्र से कोई बड़ा नेता इसमें शामिल नहीं हुआ। इस बारे में जब जिलाध्यक्ष जैन से पूछा गया तो बोले यह तो सम्मान समारोह ही नहीं था। मैं तो अपने चैंबर में बैठा हुआ था और सभी नौ ब्लॉक अध्यक्ष मालाएं लेकर वहां आए। उन्होंने मुझे मालाएं पहनाईं तो मैंने भी सभी ब्लॉक अध्यक्षों को मालाएं पहना दीं। ऐसा इसलिए भी है कि इस बार ब्लॉक अध्यक्षों की घोषणा में जिलाध्यक्ष चांदमल जैन की ही चली। उनको विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया गुट का माना जाता है, ऐसे में ब्लॉक अध्यक्ष बनाने में मालवीया की सहमति भी मानी जा रही है। यहीं कारण चार विधानसभा क्षेत्रों में विरोध का कारण भी बना। गौरतलब है कि डूंगरपुर में पूर्व विधायक लालशंकर घाटिया नए ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर खुलकर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा के विरोध में आ चुके हैं।

विलंब से सूची जारी, ऐसे में ब्लॉक अध्यक्षों की भूमिका पर सवाल : ब्लॉक अध्यक्षों की जो सूची जारी की है, वह करीब एक साल पहले लिए फीडबैक के आधार पर है। जबकि एक साल के दौरान कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया। राजस्थान के उपचुनाव में शानदार सफलता हासिल की है। माहौल बदला। ऐसे में उस समय निर्धारित नामों का वर्तमान परिदृश्य में तालमेल नहीं बैठ रहा है। अब चूकि विधानसभा चुनाव में महज पांच महीने का ही समय बचा है, ऐसे में टिकट वितरण में इनके फीडबैक को महत्व मिलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि अब तक कांग्रेस दावेदारों का फीडबैक भी ले चुकी है। पिछले कुछ समय से जिले में आए पर्यवेक्षक इसका माध्यम भी बने थे।

ये हैं विधानसभावार विरोध के कारण

बांसवाड़ा : बांसवाड़ा और छोटी सरवन दोनों ही ब्लॉक के अध्यक्षों को बदला गया है। बांसवाड़ा में राकेश सेठिया के स्थान पर अर्जुनसिंह को और छोटी सरवन में केशव निनामा को हटाकर जगदीश कटारा को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। यहां पर पूर्व विधायक अर्जुन बामनिया और मालवीया गुट के राजेश कटारा दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि दोनों ही इन ब्लॉक अध्यक्षों को अपना बता रहे है लेकिन छोटी सरवन से केशव निनामा को हटाने से क्षेत्र में चर्चा का दौर शुरू हो चुका है। निनामा के काम को देखते हुए इनका यहां पर दावा मजबूत था लेकिन वे गुटबाजी का शिकार हो गए। प्रदेश कांग्रेस सचिव अर्जुन बामनिया ने भी यही कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी की अोर से ऐसे आयोजन की कोई भी पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई थी,इसी कारण वे ब्लॉक अध्यक्षों के अभिनंदन समारोह में नहीं जा पाए।

गढ़ी : इस विधानसभा क्षेत्र के गढ़ी ब्लॉक से योगेश जोशी और सरेड़ी बड़ी ब्लॉक से देवेंद्र त्रिवेदी को अध्यक्ष बनाया गया है। त्रिवेदी पहले ही इस पद पर रहे है जबकि जोशी नए है। इस विधानसभा क्षेत्र में पाटीदार और राजपूत समाज का भी अच्छा खासा दखल है। बताया जा रहा है कि दोनों ही पदों पर ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व देने से अन्य समाजों में अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। इस बदलाव को पूर्व विधायक कांता भील के विरोध के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व विधायक कांता भील का कहना है कि उन्हें ब्लॉक अध्यक्षों के स्वागत -अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन रखे जाने की पूर्व सूचना नहीं थी। इसी कारण मैं उस कार्यक्रम में नहीं आ पाई।

घाटोल : घाटोल ब्लॉक के अध्यक्ष नेमीचंद जैन को बदल कर योगपालसिंह को बनाया गया है। यहां पर पूर्व संसदीय सचिव और कांग्रेस के बागी रहे नानालाल निनामा और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके शांतिलाल निनामा के बीच तगड़ी गुटबाजी है। नानालाल को मालवीया समर्थक माना जाता है। ऐसे में नए ब्लॉक अध्यक्ष को नानालाल की ही पंसद का माना जा रहा है। ऐसे में विवाद बढ़ा है।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बने ब्लॉक अध्यक्ष

मैं तो अपने चैंबर में बैठा हुआ था और सभी नौ ब्लॉक अध्यक्ष मालाएं लेकर वहां आए। उन्होंने मुझे मालाएं पहनाईं तो मैंने भी सभी ब्लॉक अध्यक्षों को मालाएं पहना दीं। अभी सभी ब्लॉक अध्यक्षों का अभिनंदन कार्यक्रम रखा ही कहां है, कार्यक्रम तो अब रखेंगे, जिसमें सभी को आमंत्रित करेंगे। रही ब्लॉक अध्यक्षों को नियुक्त करने की बात तो इसमें पूर्व सर्वे रिपोर्ट को ही आधार बनाया गया है। चांदमल जैन, जिलाध्यक्ष

कुशलगढ़ : यहां पर पूर्व अध्यक्ष रजनीकांत खाबिया को हटाकर जयंती लाल कोवालिया को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। खाबिया को मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और क्षेत्र में कांग्रेस के कद्दावर नेता महेश जोशी का समर्थक माना जाता है। इस बदलाव के बाद से ही यहां पर अंदरखाने खींचतान शुरू हो चुकी है। इस बारे में जोशी ने कहा मैं सिर्फ कांग्रेस के लिए ही काम करता हूं न कि किसी व्यक्ति के लिए।

ग्राम सचिव अब बाबू और पंचायत प्रसार अफसर को नहीं दे सकेंगे चार्ज

डूंगरपुर। ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास अधिकारी का पद केवल ग्राम विकास अधिकारी ही संभाल सकेंगे। ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का चार्ज अब ग्राम पंचायत के कनिष्ठ लिपिक व पंचायत प्रसार अधिकारी को नहीं दिया जा सकेगा। यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त ने गुरुवार को जारी किए हैं। ग्रामसेवक के पद का नाम ग्राम विकास अधिकारी किए जाने के बाद यह राजस्थान पंचायती राज मंत्रालय का दूसरा बड़ा निर्णय है। इससे ग्रामसेवकों विकास अधिकारियों द्वारा किए जा रहे मनमर्जी के तबादलों पर रोक लगेगी। इस आदेश के लिए ग्रामसेवक लंबे समय से प्रयासरत थे। वहीं ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त होने और लंबे समय से छुट्टी पर होने पर ही यह चार्ज कनिष्ठ लिपिक को दिया जा सकेगा। वहीं आदेश में बताया गया है कि यदि इस आदेश की अवहेलना की जाती है तो संबंधित मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विकास अधिकारी पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

ये थी समस्या : पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारी का चार्ज विकास अधिकारी बार-बार बदलकर कभी पंचायत प्रसार अधिकारी तो कभी बाबू, पंचायत सहायक को सौंप देते थे। इससे काम में दिक्क्त होती थी।

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