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4 दिन में एक वाहन चोरी, चार महीने में 38 वाहन चुराए गैंग ने

3 वर्ष पहले
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077 वाहन चोरी हुए थे साल 2017 में

इस साल 11 वाहन ही किए बरामद।

वाहन चोरी के बाद पुलिस की लापरवाही

वाहन चोरी होने की सूचना के बाद पुलिस काफी लापरवाही बरतती है। कंट्रोल रूम से नाकाबंदी की सूचना मिलने के बाद भी नाकाबंदी में लापरवाही की जाती है। पीडि़त रिपोर्ट लिखवाने के लिए थाने पहुंचता है तो आसानी से उनकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की जाती है।

चोरी की बाइक मिलने के बाद काटने पड़ते हैं चक्कर : पीडि़त बाइक चोरी होने के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा देता है। इस दौरान अगर उसकी बाइक कहीं पर मिल जाती है तो बाइक को लेने के लिए उसे चक्कर काटने पड़ते है। पीडि़त को कोर्ट में जाकर बाइक के दस्तावेज जमा करवाकर सुपुर्दगी करवानी पड़ती है, तब जाकर उसे थाने से बाइक मिल पाती है।

डूंगरपुर. जिले में तीन महीने में वाहन चोर पुलिस के लिए सिर दर्द बने हुए है। जिले में औसत हर तीन-चार दिन में एक वाहन चोरी हो रहा है। वाहन चोरों ने 2018 में सिर्फ 4 महीने 38 वाहन चोरी हुए। इनमें चोरी के 11 वाहन बरामद हुए। पिछले दो सालों की तुलना करें तो चार महीने में वाहन चोरी की वारदातें बढ़ी है।

वर्ष 2016 2017 2018

वाहन चोरी/बरामद चोरी/बरामद चोरी/बरामद

दुपहिया 54/28 77/32 38/11

चौपहिया 6/3 13/7 01/0

पांच से छह हजार में बेच देते बाइक

जिले में बाहर के वाहन चोर गैंग सक्रिय है। बाइक चोर शहर से बाहर कई लोगों से संपर्क रखते है। इसके बाद बाइकों को खोलकर अलग-अलग पार्ट्स तक बेच देते है। इसके अलावा बाइकों को कई बार पांच से छह हजार रुपए में भी बेच दिया जाता है।

कंटेंट : विक्रमसिंह सोलंकी

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