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28 लाख खर्च कर सुधारेंगे पेयजल सप्लाई, एक लाख लोगों को फायदा

3 वर्ष पहले
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ग्रीष्म संवर्धन पेयजल योजना के तहत जिले में 28 लाख की पेयजल योजना की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी हुई है। स्वीकृति के लिए पीएचईडी राज्यमंत्री सुशील कटारा के प्रयास रंग लाया है। जिसके कारण शहर सहित करीब आधे दर्जन गांवों में इसी माह गर्मी को देखते हुए पाइपलाइन बिछाने, पंप सेट और प्रेशर बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू होगा। जिससे करीब 1 लाख लोगों को सीधा फायदा होगा। योजना में टेंडर प्रक्रिया का काम विभाग की ओर से शुरू कर दिया गया है। जो इस माह खत्म हो जाएगी और वर्क ऑर्डर भी दे दिया जाएगा। जिससे आम लोगों को योजना का फायदा जल्द मिलना शुरू होगा।

जिलेभर में मिलेगा लाभ, सालों से हो रहा पानी का संकट दूर होगा

शहरी क्षेत्र के लिए : शहरी क्षेत्र में विभिन्न बस्ती में पाइप लाइन बिछाने के लिए करीब 11 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। जिसमें एसी प्रेशर पाइप लाइन हटाकर डीआईक्साईड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही कुछ कॉलोनी में टेल एंड में पर्याप्त प्रेशर से पेयजल उपलब्ध नहीं होता है। इसके लिए वर्जिन पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी।

1. नवाडेर बस्ती में पटेल वाड़ा बस्ती में नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जिससे पिछले चालीसा सालों में अल्प दबाव की शिकायत यहां पर खत्म होगी।

2. घाटी मदार फली : यहां पर भी अल्प दबाव और ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण पेयजल नहीं मिलता था। सकड़ी गलियां होने के कारण पेयजल पहुंचाना थी टेड़ी खीर था। अब डीआईक्साईड पाइपलाइन के माध्यम से सीधे क्षेत्र में पानी पहुंचेगा।

3. आरएनटी कॉलोनी : यहां पर पत्रकार कॉलोनी की टेल एंड पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाता है। जिसके कारण अंतिम छोर के उपभोक्ताओं को पानी ही नहीं मिलता था। वहीं कई नए मकानों के लिए पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई थी। अब पीएचईडी की ओर से वर्जिन पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जिससे अंतिम छोर वाले लोगों को पेयजल मिल सके। वहीं कॉलोनी को हाउसिंग बोर्ड शिवाजी नगर के पास टेलीफोन एक्सचेंज पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। जिससे प्रेशर बराबर मिल सके।

आरएनटी कॉलोनी में चल रहा पाइपलाइन का काम।

ग्रामीण क्षेत्रों में : ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल योजना में छोटी-मोटी कमी के कारण हो रही परेशानी को कुछ हद तक खत्म करने की कोशिश की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना में सुधार और संवर्धन पर फोकस किया गया है। योजना में लगभग 17 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है।

1. नंदौड़: योजना में 4.57 लाख रुपए खर्च होंगे। जिसमे वर्तमान में चल रही योजना में सुधार के साथ ही नई पाइपलाइन बिछाने, लीकेज लाइन को हटाने और सुधारने का कार्य किया जाएगा।

2. गामड़ा बामणिया: गांव में पुरानी राइजिंग लाइन(मुख्य पाइपलाइन) को हटाया जाएगा। इसकी जगह डीआई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जिसमें करीब 3.54 लाख खर्च होंगे। जिससे पानी की सप्लाई में सुधार होगा।

3. ठाकरड़ा: यहां पर भी 2 लाख 30 हजार की लागत की पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा।

4. बनकोड़ा: 3.87 लाख की नई पाइपलाइन और कुछ नई बस्ती के लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

5. बड़ौदा: यहां पर नय पंप हाऊस के लिए पंप सेट और पैनल दिया गया है। जिसमे पानी खिंचने में आसानी रहेगी। वहीं ग्रामीणों को पर्याप्त प्रेशर से पानी दिया जाएगा। यहां पर करीब 1.96 लाख रुपए खर्च होंगे।

भास्कर नॉलेज : पाइप लाइन के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

डाइऑक्साइड आयरन पाइप लाइन: यह एक विशेष प्रकार की पाइप लाइन होती है, जिसे विशेष आयरन ऑक्साइड और लोहे को मिक्स कर बनाया जाता है। इससे इसकी मजबूती काफी बढ़ जाती है। खास बात यह है कि इस विशेषज्ञ इस पाइप लाइन की उम्र करीब 100 साल बताते हैं, यानी की यह तब तक खराब नहीं होती है। जबकि इससे पहले सीमेंट की पाइप लाइन डाली जाती थी। जो मिट्टी खिसकने या ज्यादा प्रेशर होने पर टूट जाती थी, लेकिन डाइऑक्साइड आयरन पाइप लाइन टूटती नहीं है। इसमें लीकेज की भी समस्या नहीं होती है।



वर्जिन पाइप लाइन : कई बार पाइप लाइन बिछाने के बाद भी टेल तक पानी नहीं पहुंचने की समस्या आम बात होती है। इससे निजात पाने के लिए वर्जिन पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल यह एक प्रकार का पाइप लाइन का तंत्र होता है, जिसमें एक पाइप के पास में ही दूसरे पाइप की लाइन बिछाई जाती है और उसमें वाल्व लगा दिए जाते हैं। जिसकी मदद से टेल तक पानी प्रेशर के साथ पहुंचता है। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि एक मोहल्ले में कुल दस घर हैं तो पहले पांच घरों में एक पाइप लाइन से और बाकी पांच घरों दूसरी पाइप लाइन से पानी पहुंचाया जाता है। (जलदाय विभाग के एईएन आलोक गरासिया के अनुसार)

शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजना के लिए बजट स्वीकृत हुए है। जिसमे टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही काम शुरू होगा। जिससे पेयजल योजना में सुधार का काम होगा। - जयंती लाल मोची, एक्सईएन जलदाय विभाग डूंगरपुर

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