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पहली बार माछलिया गांव में पहुंची बिजली ग्रामीण बोले- अब नहीं रहेगा पैंथर का डर

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

एक ऐसा गांव, जहां सात दिन पहले लोगों को आजादी के बाद रोशनी के रूप में खुशियां नसीब हुई। अब तक चिमनियां घर को रोशन करती थी, लेकिन अब बिजली के बल्ब की रोशनी से गांव रोशन हो चुका है। यह क्षण गांव में सात दिन पहले आया, जबकि बिजली के पोल लगे, बीपीएल योजना के तहत गांव के लोगों को कनेक्शन दिए गए।

खास बात तो यह है कि यह शहर से 30 किमी, पुनाली से 8 किमी और हड़मतियां गांव से 3 किमी अंदर जंगल में बसा हुआ है। गांव का नाम माछलिया है। आने-जाने के लिए कच्चा रास्ता है। इस जंगल में 3 शावकों के साथ ही एक पैंथर का कुनबा रहता है। गांव की परंपरा बन चुकी है कि सूर्यास्त होने के बाद घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं, मवेशियों को घरों के अंदर बांध दिया जाता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति कितनी भी कठिन परिस्थिति हो, लेकिन बाहर नहीं निकलते हैं, लेकिन अब बिजली की रोशनी आ चुकी है तो कुछ हिम्मत भी आ चुकी है।

हर सुविधा 3 किमी दूर, सूरज ढलने के बाद बाहर निकलने में भी था खतरा

बिजली लाइन पहुंचने पर पोल के साथ खड़े ग्रामीण।

सामूहिक गोठ का आयोजन रखा

पहली बार बिजली पहुंचने पर खुशियां छा गई है। इसके लिए गांव के सभी लोगों ने मिलकर सामूहिक गोठ (भोजन) का कार्यक्रम रखा है। ग्रामीणों के मुताबिक दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना गांव के लिए वरदान साबित होगी। इधर, सहायक अभियंता विजय यादव ने कहा कि अब गांव में नियमित बिजली देंगे।

गांव के सबसे बुजुर्ग किशनलाल ने बताया कि इस गांव की स्थिति यह है कि हर सुविधा 3 किमी दूर हड़मतियां में मिलती है। चाहे गेहूं का पीसा ने की बात हो या फिर मोबाइल रिचार्ज कराने की बात हो। यहां तक कि स्कूल भी हड़मतियां में ही है। ऐसी स्थिति में गांव के लोग काम से हड़मतियां जाते थे और शाम हो जाती तो रिश्तेदार के वहीं ठहर जाते। रात में गांव आने का खतरा कोई भी नहीं उठाता। किशनलाल ने बताया कि पहली बार बिजली आई है तो ऐसा महसूस हो रहा है कि गांव में होली और दिवाली दोनों एक साथ आ गई है।

3 माह पहले पैंथर ने हमला किया था

ग्रामीणों के अनुसार तीन माह पहले ही पैंथर ने सूर्यास्त के समय ही बकरियों के एक झुंड पर हमला किया और तीन बकरियों को घायल कर दिया था। इलाज के दौरान दो की मौत हो गई थी। किशनलाल ने बताया कि उजाले में पैंथर नहीं आता है, ऐसा कहा जाता है। अब एक-एक बल्ब आंगन में भी लगाया जाएगा।

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